
भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर बॉर्डर की घेराबंदी का काम तेजी से चल रहा है. कूच बिहार जिले के माथाभंगा I ब्लॉक के सतग्राम मानबारी इलाके के तीन निवासियों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के काम को आसान करने के लिए स्वेच्छा से 33 डेसिमल ज़मीन दान की है.
इनका कहनाहै कि बॉर्डर की घेराबंदी नहीं होने की वजह से यहां से लगातार घुसपैठ और तस्करी होती रही है. इससे उनके फसलों को भी नुकसान होता है.
जमीन देने वाले बिकास राय ने कहा कि उन्होंने गांव की भलाई और देश की सुरक्षा के लिए ज़मीन दान की है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बाड़ लगाने से घुसपैठिए सीमा पार नहीं कर पाएंगे. केंद्र सरकार की इस पहल की और तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि बाड़ का काम पूरा होने के बाद गांव और देश दोनों सुरक्षित हो जाएंगे.
इस शख्स ने कहा, "हमने 20 डेसिमिल जमीन दी है. हमने यह जमीन इसलिए दी ताकि हम सुरक्षित और महफ़ूज़ रह सकें और हमारा देश भी सुरक्षित रहें. इसीलिए मेरा मतलब है. यह एक अच्छी बात है और ऐसा होना ही चाहिए. पहले जब बाड़ नहीं थी तो बांग्लादेशी नागरिक यहां आ जाते थे. वे रात में आकर मवेशी चुरा ले जाते थे और हमारा सामान भी उठा ले जाते थे. इसी तरह घुसपैठ भी होती थी. बाड़ लग जाने के बाद बहुत आसानी हो जाएगी."
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का काम तेजी से हो रहा है. 28 मई 2026 को राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर BSF को 142.79 एकड़ ज़मीन सौंप दी. यह एक बड़े और ज़ोरदार अभियान का हिस्सा है. इसके तहत 11 मई 2026 को हुई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के 45 दिनों के भीतर 600 एकड़ ज़मीन हस्तांतरित की जानी है.
जमीन के बदले मिलने वाले मुआवज़े के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमें अभी तक यह नहीं मिला है. अभी इसकी प्रक्रिया चल रही है; सर्वे पूरा हो चुका है. कुछ ही दिनों में पैसा आ जाएगा."
इस बीच जमीन देने वाले एक व्यक्ति के रिश्तेदार हृदय बर्मन ने सरकार से आग्रह किया कि बाड़ लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए. उन्होंने कहा कि बाड़ लगने के बाद सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी. उन्होंने आगे कहा कि पहले यहां बड़े पैमाने पर तस्करी और चोरी होती थी, क्योंकि इस इलाके में कंटीले तारों की बाड़ नहीं थी.
उन्होंने कहा, "पहले बहुत सारी दिक्कतें होती थीं, क्योंकि उस तरफ से लोग यहां आ जाते थे. साथ ही चोरी और तस्करी की गतिविधियां भी बड़े पैमाने पर होती थीं. अगर यह बाड़ लगाने का काम पूरा हो जाता है, तो भारत की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित हो जाएगी और हम सुरक्षित महसूस करेंगे. यहां के किसानों और सीमा के करीब रहने वाले लोगों को भी बेहतर सुरक्षा मिलेगी. और यह सिर्फ स्थानीय सुरक्षा की बात नहीं है; यह हमारे पूरे देश, भारत की सुरक्षा का मामला है. इसलिए बाड़ लगाना बहुत ज़रूरी है."

बीजेपी नेता अमित मालदीय ने कहा कि स्थानीय हिंदू अपनी जमीन BSF को अपनी मर्ज़ी से दान कर रहे हैं, ताकि सीमा पर बाड़ लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा हो सके. सीमा के पास रहने वाले लोग तस्करों अवैध घुसपैठियों और सीमा सुरक्षा के पूरी तरह से चरमरा जाने से तंग आ चुके हैं. वे चाहते हैं कि बाड़ लगाने का काम बिना किसी देरी के पूरा हो जाए.
उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया था कि स्थानीय लोग अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं और उनकी सरकार उन पर ज़बरदस्ती नहीं करना चाहती. लेकिन जमीनी सच्चाई इसके ठीक उलट है. स्थानीय लोग बाड़ लगाने का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे इसका पूरी तरह से समर्थन कर रहे हैं. ममता बनर्जी चाहती थीं कि सीमा तस्करों और बांग्लादेशी वोट-बैंक की राजनीति के लिए खुली रहे.