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न शस्त्र, न रौद्र रूप और ध्यान में लीन मां दुर्गा... हादसे वाली जगह चोरबागान में 91 साल से लग रहा पंडाल

कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के दौरान हुए हादसे ने सबका ध्यान खींचा. लेकिन इस पंडाल की कहानी सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं है. 91 साल पुरानी इस पूजा में ऐसा क्या खास है, जो इसे बाकी पंडालों से अलग बनाता है?

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कोलकाता के चोरबागान पंडाल में हादसा. (Photo: ITG)
कोलकाता के चोरबागान पंडाल में हादसा. (Photo: ITG)

कोलकाता के जिस दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के दौरान अफरा-तफरी मची, वहां मां दुर्गा का रूप बाकी पंडालों से अलग है. न हाथों में शस्त्र लेकर युद्ध करती मां दुर्गा की तस्वीर, न उनका रौद्र रूप. उत्तर कोलकाता के इस पंडाल में मां दुर्गा को अपने भक्तों के साथ ध्यान में लीन नजर आ रही हैं. महिषासुर भी उनके सामने हथियार डालता नजर आ रहा है. लेकिन इस बार बारिश के दौरान भीड़ बढ़ने से यहां हादसा हो गया. बाहर से लोग भीगने से बचने के लिए पंडाल में घुसने लगे. पहले से मौजूद भीड़ के बीच दबाव बढ़ा और पंडाल का एक हिस्सा ढह गया. हादसे में करीब 40 लोग घायल हुए हैं, जबकि 17 लोगों की मौत हुई है.

91 साल पुरानी परंपरा, इस बार 'आरोब' थीम

उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हर साल बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस बार भी इसकी खास थीम लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. पंडाल की थीम 'आरोब' है. बंगाली में इसका मतलब शोर-शराबे से दूर रहना है. आयोजकों ने इसके जरिए रोजमर्रा की भागदौड़, तनाव और टकराव से दूर होकर शांति तलाशने का संदेश दिया है.

Accident at Chorbagan pandal in Kolkata

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पंडाल की सजावट, रोशनी और आवाज के इंतजाम में भी इसी सोच को जगह दी गई है. इसकी भव्यता सिर्फ सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रस्तुति एक खास विचार के इर्द-गिर्द तैयार की गई है.

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मां दुर्गा का शांत रूप, महिषासुर ने डाले हथियार

आमतौर पर दुर्गा पूजा के पंडालों में मां दुर्गा को महिषासुर से युद्ध करते हुए दिखाया जाता है. चोरबागान में इस बार तस्वीर अलग है. यहां मां दुर्गा उग्र योद्धा के बजाय शांत मुद्रा में ध्यान करती नजर आती हैं. उनके भक्त भी ध्यान में बैठे हैं. वहीं, महिषासुर को उनके सामने हथियार डालते हुए दिखाया गया है. दरअसल, इस प्रस्तुति के जरिए आयोजक हिंसा और दुश्मनी के बजाय शांति, धैर्य और सद्भाव का संदेश दे रहे हैं. क्योंकि 'आरोब' थीम लोगों को शोर-शराबे से दूर रहकर सुकून और आपसी मेल-जोल की अहमियत समझाने की कोशिश करती है.

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हादसे के बाद भीड़ प्रबंधन पर सवाल

चोरबागान उत्तर कोलकाता का घनी आबादी वाला इलाका है. यहां सड़कें और गलियां संकरी हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर आवाजाही मुश्किल हो जाती है. हादसे के बाद घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. पंडाल से अस्पताल की दूरी करीब दो से तीन किलोमीटर बताई गई थी. इलाके में भीड़ के कारण घायलों को बाहर निकालने और अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी आई.

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घटना के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल कलकत्ता मेडिकल कॉलेज पहुंचे. वहीं, पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी. पश्चिम बंगाल सरकार ने घटना से जुड़ी जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया था. इस हादसे ने दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ संभालने की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. चोरबागान में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे थे. ऐसे में बारिश के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने, लोगों की आवाजाही बनाए रखने और आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के इंतजाम कितने पुख्ता थे, यह अहम सवाल है.

 

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