तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के माता-पिता और उनकी कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स (Leaps and Bounds) ने हाईकोर्ट का रुख किया है. बनर्जी फैमिली ने कोलकाता नगर निगम (KMC) की ओर से जारी नोटिस को कोलकाता हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी के स्वामित्व वाली कई संपत्तियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था और इसी संबंध में नोटिस जारी किया था. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नोटिस के जवाब में अभिषेक बनर्जी के प्रतिनिधि ने 25 मई को नगर निगम अधिकारियों के समक्ष सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे और औपचारिक रूप से जवाब भी दे दिया गया था.
याचिका में कहा गया है कि जवाब और दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद नगर निगम ने नोटिस वापस नहीं लिया. इसके चलते अभिषेक बनर्जी के माता-पिता और उनकी कंपनी को अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि जब संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध करा दी गई है, तब नोटिस को जारी रखना उचित नहीं है. इसी आधार पर नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है.
मामले की सुनवाई बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की पीठ के समक्ष होने की संभावना है.
बता दें कि, कोलकाता नगर निगम (KMC) ने कथित अवैध निर्माण को लेकर अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए थे. नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे हैं. जिन संपत्तियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें अभिषेक बनर्जी की मां, पिता और उनकी कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ के पते भी शामिल हैं. हरीश मुखर्जी रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांतिनिकेतन’ को भी नोटिस जारी किया गया था.
कोलकाता नगर निगम से जुड़े कथित नोटिस पर कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा था कि उन्हें इस “कथित नोटिस” की कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि ऐसे नोटिस मेयर की सहमति से जारी नहीं किए जाते हैं. टीएमसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए फिरहाद हकीम ने कहा था कि जो सूची सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही है, उसकी पहले सत्यता की जांच होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि मेयर एक पॉलिसी मेकर होता है, जबकि नगर निगम आयुक्त प्रशासनिक और कार्यान्वयन संबंधी फैसले लेते हैं. फिरहाद हकीम ने कहा कि मेयर के पास इस तरह के मामलों में कोई विशेषाधिकार या प्रत्यक्ष अधिकार नहीं होता. उन्होंने संकेत दिया कि नोटिस जारी करने और प्रशासनिक कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आती है.