
यूपी के मथुरा जिले में चंद्रशेखर उर्फ 'फरसा वाले बाबा' की मौत के बाद जमकर बवाल देखने को मिला. गुस्साई भीड़ ने हाइवे जाम कर दिया और पथराव किया. हालात संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. फिलहाल, मौके पर शांति-व्यवस्था कायम है और उपद्रवियों पर एक्शन लिया जा रहा है. आइये जानते हैं कौन थे 'फरसा वाले बाबा' जिनकी मौत के बाद मथुरा में उपद्रव देखने को मिला...
कौन थे फरसा वाले बाबा?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बाबा चंद्रशेखर मूल रूप से फिरोजाबाद के एक गांव के रहने वाले थे. उन्होंने अल्पायु में माता-पिता के निधन के बाद घर छोड़ दिया था और साधु बन गए थे. वह 1992 के राम मंदिर आंदोलन में शामिल हुए थे. बाद में मथुरा के आजनौख गांव आ गए. उन्होंने हाथों में फरसा लेकर रात-भर गौ-वंश की रक्षा करने का संकल्प लिया था, जिसके कारण वे पूरे ब्रज क्षेत्र में 'फरसा वाले बाबा' के नाम से फेमस हो गए.
गौसेवा के प्रति थे समर्पित
समर्थकों के अनुसार, बाबा ने आजनौख में एक विशाल गौशाला स्थापित की थी और करीब 200 युवाओं की एक समर्पित 'गौ-रक्षक फौज' भी तैयार की थी. वे अक्सर रात के अंधेरे में अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर गौ-तस्करों से भिड़ जाते थे. अपने जीवनकाल में उन्होंने सैकड़ों गायों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया. उनकी निडरता के चलते उन पर कई बार जानलेवा हमले हुए थे, लेकिन वे पीछे नहीं हटे.
मौत के बाद तांडव
बीते शनिवार को मथुरा के कोसीकलां इलाके में बाइक सवार गौ-सेवक बाबा चंद्रशेखर उर्फ 'फरसा वाले बाबा' को एक वाहन से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया. यह घटना तब हुई जब बाबा को गौ-तस्करी की सूचना मिली थी और वे अपनी टीम के साथ तस्करों के संदिग्ध वाहन का पीछा कर रहे थे. जैसे ही बाबा की मौत की खबर फैली इलाके में बवाल शुरू हो गया. आक्रोशित भीड़ ने इंसाफ की मांग को लेकर दिल्ली-आगरा नेशनल हाइवे को पूरी तरह जाम कर दिया और पुलिस पर पथराव किया.

लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले
शनिवार सुबह बाबा की मौत की खबर फैलते ही हजारों की संख्या में समर्थक और हिंदूवादी संगठन सड़कों पर उतर आए. भीड़ ने दिल्ली-आगरा हाइवे पर चक्का जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया और पथराव किया. पुलिस को उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा. फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है.
सीएम का सख्त रुख, संतों का रिएक्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वारदात पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि फरार हुए आरोपियों की तलाश की जा रही है. उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने भी 'फरसा वाले बाबा' की मौत पर रिएक्ट किया है. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन की मांग की है. श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी महाराज ने भी 'फरसा वाले बाबा' की मौत को दुभाग्यपूर्ण करार दिया है.
मामले में पुलिस का बयान
इस मामले में मथुरा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चंद्रशेखर उर्फ 'फरसा वाले बाबा' की मृत्यु गौ-तस्करी के दौरान नहीं, बल्कि घने कोहरे के कारण हुई एक सड़क दुर्घटना में हुई है. पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही हत्या की अफवाहों को खारिज करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है.

बयान के अनुसार, बाबा ने संदेह के आधार पर एक कंटेनर को रुकवाया था, जिसमें जांच के दौरान केवल किराने का सामान (परचून) मिला. इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक, जिसमें लोहे के तार लदे थे, ने घने कोहरे के कारण बाबा की बाइक को जोरदार टक्कर मार दी. इस भीषण भिड़ंत में बाबा चंद्रशेखर और ट्रक ड्राइवर दोनों की मौत हो गई.
अधिकारियों का मानना है कि शुक्रवार और शनिवार की रात अचानक बदले मौसम और भारी धुंध के कारण विजिबिलिटी बेहद कम थी, जो इस हादसे की मुख्य वजह बनी. हालांकि, भले ही प्रशासन इसे महज एक दुर्घटना करार दे रहा है, लेकिन बाबा के समर्थक और उनके सहयोगी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. घ
टना के समय बाबा के साथ बाइक पर मौजूद हरिओम का दावा है कि यह एक सोची-समझी साजिश है और ट्रक ने जानबूझकर टक्कर मारी. फिलहाल, मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश ने आश्रम पहुंचकर लोगों को सांत्वना दी. उन्होंने कहा कि बाबा का गौ-सेवा में अतुलनीय योगदान रहा है और उनकी गौशाला की जिम्मेदारी अब सरकार उठाएगी.