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UPPCL में 'जाति और धर्म' देखकर बांटी गईं नौकरियां? ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का बड़ा दावा- कुशल हटाए गए, चहेते रखे गए

उत्तर प्रदेश में ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष के बीच चल रहा अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. मंत्री ने अधिकारी पर बिना बताए बिजली दरें बढ़ाने, काम करने वाले कुशल कर्मचारियों की छंटनी करने और बिना सूचना गायब रहने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं.

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यूपी के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा
यूपी के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा

यूपी के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने लखनऊ में यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक कड़ा पत्र लिखकर प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था में मनमानी करने का गंभीर आरोप लगाया है. मंत्री ने 11 जून 2026 को सार्वजनिक हुए इस पत्र में विभाग के भीतर जाति, धर्म और भ्रष्टाचार के आधार पर भर्तियां करने तथा बिना विभागीय सहमति के उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज (FPPAS) का बोझ डालने पर तीखा ऐतराज जताया है. उन्होंने इसकी जानकारी मीडिया से मिलने पर नाराजगी व्यक्त की है.

जाति और धर्म के नाम पर भर्ती के आरोप

ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और पावर कॉर्पोरेशन के बीच का अंतर्विरोध अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुका है. मंत्री ने आरोप लगाया कि विभाग में लंबे समय से कार्यरत अनुभवी और कुशल कर्मचारियों की सोची-समझी रणनीति के तहत छंटनी की जा रही है. उनके स्थान पर मनमाने ढंग से जाति, धर्म और भ्रष्टाचार के आधार पर अकुशल लोगों की नियुक्तियां की गईं, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. मंत्री ने सहारनपुर के एक लाइनमैन को हटाने का विशेष उल्लेख करते हुए इसे प्रशासनिक समस्याओं की बड़ी वजह बताया.

चेयरमैन की कार्यशैली और गायब रहने पर सवाल

पत्र में ऊर्जा मंत्री ने यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है. शर्मा ने दावा किया कि यह शीर्ष अधिकारी अक्सर बिना किसी पूर्व सूचना या जानकारी दिए अपने कार्यस्थल से गायब रहते हैं. मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ विद्युत कर्मियों ने जानबूझकर या घोर लापरवाही से कार्य करके वर्तमान सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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बिना सूचना बिजली बिल बढ़ाने पर जताई नाराजगी

मंत्री ने 29 मई को यूपीपीसीएल द्वारा घोषित 10 प्रतिशत फ्यूल एंड पावर पर्चेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) पर गहरी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से जून के बिल में अतिरिक्त शुल्क वसूलने जैसे महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी उन्हें किसी सरकारी फाइल से नहीं बल्कि टीवी और मीडिया से मिली. मंत्री ने सवाल उठाया कि इतने बड़े नीतिगत निर्णय से पहले विभागीय मंत्री की सहमति या पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई. उन्होंने चेतावनी दी कि इसे शासन का सख्त निर्देश माना जाए और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो.

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