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यूपी में बसेंगे तीन और शहर, जानिए क्या है सीएम योगी का नया प्लान

सीएम योगी ने यूपी में तीन और नए शहर बसाने का फैसला लिया है. आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहर विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. योगी कैबिनेट ने 225 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने को मंजूरी दी है. इसके अलावा महायोजना विहीन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए नई एसओपी को भी हरी झंडी मिली है. इन फैसलों से शहरी विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा.

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CM योगी आदित्यनाथ ने यूपी में तीन और शहर बसाने का फैस्ला लिया है. (Photo: ITG)
CM योगी आदित्यनाथ ने यूपी में तीन और शहर बसाने का फैस्ला लिया है. (Photo: ITG)

यूपी की तेजी से बढ़ती आबादी और शहरों पर बढ़ते दबाव के बीच योगी सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के शहरी नक्शे को पूरी तरह बदल सकता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहर विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. सरकार ने इन तीनों शहरों के सुनियोजित विकास के लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है.

सरकार का दावा है कि यह सिर्फ नए आवासीय क्षेत्रों का विस्तार नहीं होगा, बल्कि ऐसे आधुनिक शहर तैयार किए जाएंगे जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे. इसमें बेहतर सड़क नेटवर्क, आधुनिक आवासीय सुविधाएं, रोजगार के अवसर, हरित क्षेत्र और नागरिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा.

आखिर क्यों पड़ रही है नए शहरों की जरूरत

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों की आबादी तेजी से बढ़ी है. रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों के कारण लोग लगातार शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. इसका असर यह हुआ कि पुराने शहरों पर दबाव बढ़ता गया. ट्रैफिक जाम, अव्यवस्थित कॉलोनियां, सीमित आवास और बुनियादी सुविधाओं पर बोझ जैसी समस्याएं सामने आने लगीं. ऐसे में सरकार ने तय किया है कि केवल पुराने शहरों का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से नए शहरी क्षेत्र विकसित किए जाएं. इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण और नए शहर प्रोत्साहन योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है.

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आगरा, बरेली और प्रयागराज क्यों चुने गए

इन तीनों शहरों का अपना अलग महत्व है. आगरा विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान रखता है. ताजमहल के कारण यहां देश-विदेश से लाखों पर्यटक पहुंचते हैं. दूसरी ओर बरेली पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र बनकर उभर रहा है. वहीं प्रयागराज धार्मिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण शहर माना जाता है. महाकुंभ 2025 के बाद प्रयागराज के विकास की संभावनाएं और बढ़ गई हैं. सरकार का मानना है कि इन शहरों में आने वाले वर्षों में आबादी और आर्थिक गतिविधियों में तेज वृद्धि होगी. इसलिए अभी से योजनाबद्ध विस्तार आवश्यक है.

क्या है मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना

प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2023 में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण और नए शहर प्रोत्साहन योजना के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे. इस योजना का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराएगी. यह सहायता अधिकतम 20 वर्षों तक दी जा सकेगी. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विकास प्राधिकरणों और अन्य एजेंसियों पर वित्तीय दबाव कम होगा और वे बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के निर्माण पर तेजी से काम कर सकेंगे.

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3500 करोड़ का बजट, पहली किस्त भी मंजूर

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना में 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है. आगरा, बरेली और प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास के लिए कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल स्वीकृत की गई है. इन परियोजनाओं को गति देने के लिए पहली किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी करने का भी निर्णय लिया गया है. इससे जमीन अधिग्रहण और प्रारंभिक विकास कार्यों को तत्काल शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना तय समयसीमा के भीतर लागू होती है तो आने वाले दशक में उत्तर प्रदेश के शहरी विकास का मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है.

कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला: बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति

कैबिनेट बैठक में सिर्फ नए शहरों को लेकर ही निर्णय नहीं लिया गया, बल्कि कारागारों से जुड़ा एक फैसला भी लिया गया. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के जेलों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में उनके आश्रितों या निकट संबंधियों को मुआवजा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी है. सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा करना, कारागार प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना और पीड़ित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना है. अब तक ऐसे मामलों में मुआवजा भुगतान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संस्तुतियों के आधार पर किया जाता था. लेकिन कई स्तरों पर अनुमोदन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण परिवारों को मुआवजा मिलने में काफी समय लग जाता था. नई नीति लागू होने के बाद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध होगी. सरकार विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी करेगी ताकि सभी मामलों में एक समान व्यवस्था लागू की जा सके.

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आम लोगों को राहत देने वाला तीसरा फैसला

योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा पूर्व में स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को भी मंजूरी दी है. दरअसल, कई क्षेत्रों में जिला पंचायतों ने भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत किए थे, लेकिन बाद में वे इलाके विकास प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आ गए. इससे ऐसे मानचित्रों की वैधता को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी. अब सरकार के फैसले से ऐसे मामलों का समाधान हो सकेगा और हजारों लोगों को राहत मिलेगी. कैबिनेट ने उन विकास क्षेत्रों और विस्तारित विकास क्षेत्रों के लिए भी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का फैसला किया है जहां अभी तक महायोजना तैयार नहीं हुई है. अब ऐसे क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के लिए स्पष्ट नियमों के तहत मानचित्र स्वीकृत किए जा सकेंगे. इससे लोगों को अनिश्चितता और प्रशासनिक परेशानियों से राहत मिलेगी. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से निर्माण गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और शहरी विकास को गति मिलेगी.

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