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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: 3 आरोपियों की 24 घंटे की पुलिस कस्टडी, आमने-सामने होगी पूछताछ

राम मंदिर में आने वाला दान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है. ऐसे में उसकी सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद अहम मानी जाती है. अयोध्या में सामने आए गबन मामले ने दान प्रबंधन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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अयोध्या कोर्ट का बड़ा फैसला, गबन मामले में तीन आरोपी पुलिस रिमांड पर. (File Photo: ITG)
अयोध्या कोर्ट का बड़ा फैसला, गबन मामले में तीन आरोपी पुलिस रिमांड पर. (File Photo: ITG)

अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच तेज हो गई है. अयोध्या कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर कर ली है. पुलिस अब तीनों से आमने-सामने पूछताछ करेगी और मामले से जुड़े सबूत जुटाने की कोशिश करेगी.

कोर्ट के आदेश के मुताबिक आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे 24 घंटे तक पुलिस कस्टडी रिमांड पर रहेंगे. अयोध्या पुलिस बुधवार सुबह 10 बजे से तीनों से पूछताछ शुरू करेगी. जांच के दौरान पुलिस तीनों आरोपियों को उनके ठिकानों पर भी लेकर जाएगी. 

वहां गबन से जुड़े सामान और अन्य साक्ष्यों की बरामदगी की कार्रवाई की जाएगी. जांच एजेंसियों के निशाने पर अनुकल्प मिश्रा की हाल ही में खरीदी गई संपत्तियां भी हैं. पुलिस उसके नए घर और गाड़ी को लेकर भी पूछताछ करेगी. जरूरत पड़ने पर इन स्थानों की तलाशी भी ली जाएगी.

इस बीच मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट भी सामने आई है. रिपोर्ट में छह लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता बताई गई है. इनमें अवनीश शुक्ला, अनुज कुमार मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, कृष्णम पाण्डेय और रामशंकर मिश्रा के नाम शामिल हैं.

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SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संबंधित लोगों ने सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं किया. अनुपालन में कमियों की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए. इससे कथित गड़बड़ियों को रोकने में लापरवाही सामने आई.

रिपोर्ट के मुताबिक. जांच के दौरान CCTV फुटेज का परीक्षण किया गया. ट्रस्ट ने SIT को बताया कि CCTV सिस्टम की स्टोरेज क्षमता सीमित थी. इसी वजह से फुटेज एक तय अवधि के बाद खुद डिलीट हो जाती थी. इसलिए सीमित अवधि की रिकॉर्डिंग ही उपलब्ध हो सकी थी.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गणना कक्ष में कुछ कर्मचारियों को नोटों की गड्डियों से खुले नोट निकालकर अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारी इशारों के जरिए एक-दूसरे को सतर्क करते दिखाई दिए.

SIT ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि CCTV फुटेज और जांच के आधार पर करीब 70 बार चोरी या गबन किए जाने के संकेत मिले हैं. हालांकि यह दावा जांच का हिस्सा है और इसकी विस्तृत पड़ताल जारी है. यदि 27 अप्रैल से पहले की फुटेज उपलब्ध होती तो और खुलासे हो सकते थे.

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