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Ground Report: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच करने अयोध्या पहुंची SIT, 8 घंटे तक खंगाले गए रिकॉर्ड

यूपी की अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले का मामला तूल पकड़ने लगा है. राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ मंडलायुक्त की अगुवाई में तीन सदस्य एसआईटी गठित की, जो सोमवार को लखनऊ से अयोध्या पहुंची.

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तीन सदस्यों की एसआईटी टीम राम मंदिर परिसर पहुंची. (Photo: ITG)
तीन सदस्यों की एसआईटी टीम राम मंदिर परिसर पहुंची. (Photo: ITG)

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की पड़ताल के लिए लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस और यूपी सरकार के वित्त विभाग के अफसर नील रतन सोमवार दोपहर करीब 2:00 बजे अयोध्या के राम मंदिर पहुंचे. तीन अलग-अलग गाड़ियों से पहुंचे तीनों अफसर वीवीआईपी गेट से अंदर गए. इससे पहले एसबीआई के अफसरों की टीम राम मंदिर परिसर में बने ट्रस्ट के दफ्तर में पहुंच चुकी थी.

राम मंदिर ट्रस्ट और मंदिर व्यवस्था से जुड़े तीन नाम सबसे महत्वपूर्ण हैं. राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा और राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव. डॉ अनिल मिश्रा को छोड़कर बाकी दोनों, चंपत राय और गोपाल राव ट्रस्ट के दफ्तर में मौजूद थे. 

अनिल मिश्रा अपनी आंख के इलाज के लिए केरल के एक बड़े अस्पताल में भर्ती हैं. सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की टीम ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए. इसके साथ ही, मंदिर प्रांगण में लगाई गई दान पेटियों का भी मुआयना किया. इस दौरान देखा गया कि दानपेटियों में से ही सीधे क्या नगदी निकाली जा सकती है, जिसकी संभावना न के बराबर नजर आई.

कैसे होता है दान में मिले रुपयों का मैनेजमेंट?

मंदिर प्रांगण में करीब 40 दान पेटियां लगी हैं. इन दान पेटियों में ही श्रद्धालुओं के द्वारा चढ़ावा डाला जाता हैं. रात में मंदिर बंद होने के बाद मंदिर ट्रस्ट के ही एक कमरे में इन्हें खोला जाता है. दान पेटी से निकले नोटों को व्यवस्थित किया जाता है. अलग-अलग नोटों की गड्डी बनाई जाती है, फिर उनको एसबीआई के अफसर की मौजूदगी में जमा करवाया जाता है. उस कमरे में जहां दान पेटी खुलती है, कैश इकट्ठा किया जाता है. वहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 50 कर्मचारियों को काम पर लगाया जाता है. इन 50 कर्मचारियों में 24 कर्मचारी, जो वाराणसी की एक निजी कंपनी के कर्मचारी होते हैं, वो नोटों की गड्डी बनाते हैं. इन 24 कर्मचारियों पर निगरानी रखने के लिए ट्रस्ट के 12 कर्मचारी होते हैं, जो इन पर नजर रखते हैं. यानी हर दो निजी कर्मचारियों के ऊपर ट्रस्ट का एक कर्मचारी नजर रखता है. 

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इसके बाद, नोटों की गिनती के लिए मंदिर परिसर में सीसीटीवी से लेकर तमाम अन्य तकनीकी काम देख रही टीसीएस के कर्मचारी और एसबीआई के 14 कर्मचारी मिलकर नोटों की गड्डी गिनते हैं और यह रकम एसबीआई में जमा करवा दी जाती है.

SIT ने क्या जांच की?

एसआईटी की टीम ने अपनी जांच का दायरा मंदिर ट्रस्ट के उस बड़े हॉल पर ज्यादा रखा, जहां दान पेटियों को खोला जाता है, नोट इकट्ठा होते हैं और गड्डी बनाकर बैंक में जमा करवाए जाते हैं. एसआईटी की टीम ने इस पूरी प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों के आने-जाने के समय का रजिस्ट्रेशन, आते और जाते समय उनकी जमा तलाशी की व्यवस्था और बीते 1 साल में कितने कर्मचारी नौकरी छोड़ी, कितने नए कर्मचारी काम करने आए, इसका ब्यौरा भी एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों की मदद से देखा गया.

इसी बीच करीब 04:00 बजे मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव मंदिर गेट से बाहर निकल आए. गोपाल राव ड्राइवर के ठीक बगल वाली सीट पर बैठे थे लेकिन चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी. यही वजह थी कि अयोध्या के स्थानीय पत्रकारों ने गोपाल राव का अभिवादन कर नमस्कार किया, तो गोपाल राव ने एक दो लोगों को ही देख कर बड़े अनमने ढंग से जवाब में अभिवादन करते हुए निकल गए.

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लेकिन डेढ़ घंटे बाद ही शाम 5.45 बजे गोपाल राव की गाड़ी फिर अंदर आते दिखाई दी. शीशा बंद कर ड्राइवर के पीछे दाहिनी तरफ की सीट पर बैठे गोपाल राव से सवाल किए गए तो बिना शीशा खोले ही गोपाल राव ने हाथ जोड़कर मना कर दिया और उनकी गाड़ी मंदिर में एंटर कर गई.

एसआईटी की टीम रात करीब 10:00 बजे मंदिर प्रांगण से निकली. लगभग 8 घंटे में एसआईटी की टीम ने बारीकी से चढ़ावा के दस्तावेजों को देखा और सीसीटीवी के पूरे सिस्टम को समझा.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर चंदा विवाद: रडार पर चंपत राय के करीबी, एक ही दिन में दो बार पूछताछ

SIT में शामिल किए गए लोग कौन हैं?

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी में जिन तीन अफसरों को शामिल किया, वह अफसर अपने-अपने क्षेत्र के माहिर हैं. लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान व्यवस्था मैनेजमेंट के अनुभवी रहे हैं, जहां पर क्राउड मैनेजमेंट के साथ-साथ फंड मैनेजमेंट का भी अनुभव है. प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर अनुभवी, तो विजय विश्वास पंत मंदिर प्रशासन के कामकाज, श्रद्धालुओं की संख्या और उनके चढ़ावे की पूरी व्यवस्था को परख रहे थे.

लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस सीबीआई रिटर्न हैं. वो ऐसी जगहों पर जहां रोज लाखों रुपए आते हों और उनका हिसाब-किताब बाद में होता हो, तो ऐसे में चोरी की संभावना और तरीके दोनों को पुलिस अफसर के तौर पर परख रहे थे. वहीं, तीसरे अधिकारी नील रतन को फंड मैनेजमेंट का अनुभव है. बही खातों में गड़बड़ी कर घोटाले पकड़ने का अनुभव है, तो नील रतन अकाउंट बुक देख रहे थे.

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फिलहाल, रात 10:00 बजे तक 8 घंटे के पड़ताल के बाद एसआईटी की टीम वापस निकल गई. 15 दिन में एसआईटी को अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है. इस जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है या नहीं? और गड़बड़ी हुई है, तो किसने की है? कितने की गड़बड़ी हुई है और कैसे की है? यह सभी बातें भी इस जांच रिपोर्ट में सरकार को बताई जाएंगी.

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