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इंदौर शिवानी हत्याकांड: पत्नी का गला घोंटा, फिर मरे हुए सांप के दांत हाथ में गड़ाए, ₹5000 में अलवर स्टेशन से खरीदा था जहरीला कोबरा

इंदौर के बैंक अधिकारी ने पत्नी की हत्या को 'सर्पदंश' का रूप देने के लिए अलवर रेलवे स्टेशन से एक सपेरे से विषैला कोबरा सांप खरीदा था, जिसके बाद अब अलवर में सांपों की तस्करी के बड़े नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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इंदौर के 'कोबरा मर्डर केस' का अलवर कनेक्शन.(Photo:ITG)
इंदौर के 'कोबरा मर्डर केस' का अलवर कनेक्शन.(Photo:ITG)

मध्यप्रदेश के इंदौर का शिवानी हत्याकांड फिर चर्चा में है. दोषी पति को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी है. इस बीच राजस्थान के अलवर जिले का नाम भी एक बार सुर्खियों में आ गया है. इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपी बैंक अधिकारी अपनी पत्नी की हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए करीब 620 किमी दूर अलवर आया था और यहां से एक विषैला कोबरा सांप खरीदकर इंदौर ले गया था. इस खुलासे के बाद अलवर में विषैले सांपों की संभावित तस्करी और अवैध कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

इंदौर जिला अदालत ने हाल ही में शिवानी हत्याकांड के आरोपी पति अमितेश उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई है. जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या के लिए एक खौफनाक साजिश रची थी.

वह राजस्थान के अलवर से करीब पांच हजार रुपए में कोबरा सांप खरीदकर इंदौर ले गया. ये कोबरा अलवर रेलवे स्टेशन से एक सपेरे से खरीदा गया बताया. इस मामले में पुलिस ने आरोपी से मौका तस्दीक कराई थी, लेकिन सपेरा नहीं मिला जिसकी तलाश में इंदौर पुलिस आई थी.

आरोपी ने सांप को 11 दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा. इसके बाद उसने पहले पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर घटना को सर्पदंश से हुई मौत साबित करने के लिए कोबरा से पत्नी के हाथ पर कटवाने का प्रयास किया. इतना ही नहीं, उसने सांप को भी मार डाला और उसके दांत पत्नी के हाथ में गड़ा दिए ताकि मौत को प्राकृतिक सर्पदंश का रूप दिया जा सके. देखें VIDEO:- 

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हालांकि, पुलिस जांच, एफएसएल रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हो गया और आरोपी की साजिश बेनकाब हो गई. घटना भले ही 1 दिसंबर 2019 की हो, लेकिन अदालत के हालिया फैसले के बाद यह तथ्य फिर सामने आया कि हत्या की साजिश में इस्तेमाल किया गया विषैला सांप अलवर से खरीदा गया था.

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इंदौर का एक व्यक्ति सीधे अलवर ही क्यों पहुंचा? क्या उसे पहले से जानकारी थी कि यहां आसानी से विषैले सांप खरीदे जा सकते हैं? यदि ऐसा है तो क्या अलवर में सांपों की तस्करी या अवैध बिक्री का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है?

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि वन्यजीव अपराध के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा भी हो सकता है.

जांच की मांग तेज
संस्थापक और सचिव सरिस्का टाइगर कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन चिन्मय मैसी ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए विस्तृत जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर अलवर में विषैले सांपों सहित अन्य छोटे वन्यजीवों की तस्करी कौन कर रहा है.

जिले में मौजूद सपेरा बस्तियों और निजी स्तर पर सांपों का रेस्क्यू करने वाले लोगों की गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि यदि आरोपी इतनी दूर से अलवर आकर आसानी से सांप खरीद सका, तो निश्चित रूप से उसे किसी ने यहां सांप मिलने की जानकारी दी होगी. उन्होंने आशंका जताई कि विषैले सांपों की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है, जिसकी गहन जांच की जरूरत है.

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अलवर में कई जगह हैं सपेरा बस्तियां
अलवर जिले में रामगढ़ क्षेत्र के पूठी गांव, दादर सहित कई इलाकों में पारंपरिक सपेरा समुदाय निवास करता है. वर्षों से ये लोग सांप पकड़ने और उन्हें दिखाकर जीविकोपार्जन करते रहे हैं, हालांकि अब यह परंपरा काफी कम हो चुकी है.

पहले कुछ सपेरे सांप के जहर से आंखों का सुरमा बनाने और बेचने का दावा भी करते थे, लेकिन इसकी वास्तविकता कभी प्रमाणित नहीं हो सकी.

सरिस्का में मौजूद हैं देश के चार सबसे खतरनाक विषैले सांप
सरिस्का टाइगर रिजर्व के जंगलों में देश के चार सबसे खतरनाक विषैले सांप यानी 'बिग फोर' की मौजूदगी दर्ज की गई है. इन्हीं चार प्रजातियों को भारत में सबसे अधिक सर्पदंश और मौतों के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

अलवर के जंगलों में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांप

इंडियन कोबरा (नाग), कॉमन करैत, रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर.

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान इन सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं और भोजन तथा सुरक्षित स्थान की तलाश में ये आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं.

सांपों की खरीद-बिक्री और तस्करी पूरी तरह गैरकानूनी
भारत में सांपों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है. कानून के अनुसार किसी भी सांप को पकड़ना, मारना, पालना, खरीदना, बेचना या उनके अंगों का व्यापार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. दोषी पाए जाने पर आरोपी को तीन से सात वर्ष तक की जेल और 25 हजार रुपए या उससे अधिक के आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है.

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विशेषज्ञों की अपील
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी घर, खेत या आबादी वाले क्षेत्र में सांप निकलता है तो उसे मारने के बजाय वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना देनी चाहिए. सांपों को पकड़ना, रखना या उनका व्यापार करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा है.

बड़ा सवाल
इंदौर हत्याकांड में अलवर का नाम सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिले में विषैले सांपों की अवैध खरीद-फरोख्त का कोई नेटवर्क सक्रिय है? यदि हां, तो इसमें कौन लोग शामिल हैं और अब तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वन विभाग और जांच एजेंसियों के लिए यह मामला अब केवल एक पुराने हत्याकांड का हिस्सा नहीं, बल्कि वन्यजीव अपराध के संभावित बड़े नेटवर्क की जांच का विषय बन गया है.

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