वेब सीरीज देखकर जल्द अमीर बनने का विचार आया और फिर नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह के तीन सदस्य नकली करेंसी की सप्लाई करने के लिए पहुंचे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपियों के पास से 5 लाख 26 हजार रुपये के नकली नोट और उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए हैं.
पुलिस की शुरुआती जांच में एक और अहम बात सामने आई है. आरोपियों ने नकली नोट बनाने के लिए जिस पेपर का इस्तेमाल किया, उसकी सप्लाई महाराष्ट्र से होने की बात कही गई है. पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क और नकली नोट बाजार तक पहुंचाने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि मेरठ-करनाल हाईवे पर कुछ लोग नकली करेंसी की सप्लाई करने के लिए आने वाले हैं. सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम, महेंद्र और टीनू के रूप में बताई गई है. पुलिस के मुताबिक, इनके कब्जे से 5 लाख 26 हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए. इसके अलावा लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन और प्रिंटिंग से संबंधित सामग्री भी मिली है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कितने समय से इस काम में शामिल थे और अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में खपाई जा चुकी है. बरामद नोटों की जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की भूमिका भी खंगाली जा रही है.
वेब सीरीज 'फर्जी' देखकर आया नकली नोट बनाने का आइडिया
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान शुभम ने कथित तौर पर बताया कि वेब सीरीज 'फर्जी' देखने के बाद उसके मन में नकली नोट बनाने का विचार आया. उसे लगा कि इस तरीके से जल्दी पैसा कमाया जा सकता है. इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया. जांच में सामने आया कि आरोपी दिल्ली के नरेला इलाके में स्थित एक फ्लैट में नकली नोट तैयार करते थे. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए प्रिंटिंग से जुड़ी जानकारी हासिल की थी.
महाराष्ट्र से आता था पेपर, पुलिस खंगाल रही सप्लाई चेन
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल नकली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए पेपर की सप्लाई को लेकर है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह को पेपर महाराष्ट्र से गणेश नाम का व्यक्ति भेजता था. इस पहलू की जांच की जा रही है कि संबंधित व्यक्ति की भूमिका क्या थी और सामग्री किन माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचती थी. पुलिस का दावा है कि आरोपी नकली नोट तैयार करने के बाद उन्हें दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य स्थानों पर सप्लाई करते थे. अब जांच का फोकस उन लोगों पर भी है, जो कथित तौर पर नकली करेंसी को बाजार तक पहुंचाने में मदद करते थे. मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने बताया कि इस मामले में अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है और जरूरत के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी.
एसएसपी सूरज कुमार राय की जुबानी उनकी कहानी
एसएसपी सूरज कुमार राय के मुताबिक, एसपी ग्रामीण और सीओ बुढ़ाना के नेतृत्व में थाना बुढ़ाना पुलिस की टीम ने गिरोह का खुलासा किया. कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और करीब 5.26 लाख रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई. उन्होंने बताया कि आरोपियों के पास से लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन और प्रिंटिंग पेपर भी मिला है. पुलिस अन्य संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिनके जरिए नकली नोटों की सप्लाई किए जाने की आशंका है. एसएसपी ने नकली करेंसी को अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी नोट की प्रामाणिकता पर संदेह हो तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उचित माध्यम से उसकी जांच करानी चाहिए. इस कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई.