ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में ग्राहकों के खातों से करीब 10.24 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोप है कि बैंक की महिला कर्मचारी दीपांशी ने दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर करीब तीन साल तक ग्राहकों के पैसे अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किए. मामले में CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने 29 अक्टूबर को FIR दर्ज की है.
अब तक 37 खाताधारक नोएडा पुलिस से शिकायत कर चुके हैं. पुलिस ने भी पहले FIR दर्ज की थी. शुरुआती तौर पर करीब 22 करोड़ रुपये गायब होने की बात सामने आई थी, लेकिन बैंक की शिकायत में 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का जिक्र है.
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बैंक की शिकायत के मुताबिक, ग्राहक संगीता 16 सितंबर को पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं तो उन्हें खाते से तीन अनजान ट्रांजेक्शन का पता चला. महिला कर्मचारी दीपांशी ने इन ट्रांजेक्शन को सही बताने की कोशिश की, लेकिन बैंक को इनके वाउचर और अनुमति से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले. पूछताछ में दीपांशी ने कथित तौर पर अशुतोष पाठक के कहने पर पैसे ट्रांसफर करने और वाउचर नष्ट करने की बात स्वीकार की.
छह अधिकारियों की आईडी का इस्तेमाल
आरोप है कि सीनियर ब्रांच मैनेजर निशा तिर्की समेत छह अधिकारियों की CBS यूजर आईडी का गलत इस्तेमाल किया गया. रकम अशुतोष पाठक के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के खातों में भी भेजी गई. कुछ ग्राहकों के मोबाइल अलर्ट बंद किए गए, ताकि उन्हें पैसे निकलने की जानकारी तुरंत न मिले.
49 एफडी में भी गड़बड़ी का आरोप
बैंक की जांच में एफडी में भी गड़बड़ी सामने आई. आरोप है कि संयुक्त खाताधारक जोड़कर एफडी समय से पहले बंद कराई गईं और रकम दूसरे खातों में भेजी गई. बैंक की सूची में 49 एफडी और 7023.77 लाख रुपये का आंकड़ा दर्ज है. हालांकि, इसका 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंध अभी जांच का विषय है.
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CBI ने दर्ज किया केस
बैंक के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडेय ने 23 अक्टूबर को शिकायत दी थी. CBI ने दीपांशी, अशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ BNS, IT एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया है. जांच DSP डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी गई है. बैंक के मुताबिक, दीपांशी ने अशुतोष को पहले से जानने और उसके कहने पर निवेश के लिए लोन लेने की बात भी अपने बयान में बताई थी. अब CBI यह पता लगाएगी कि कितने ग्राहक प्रभावित हुए, कितनी रकम निकाली गई और इस कथित धोखाधड़ी में किन लोगों की भूमिका थी. बैंक ने कहा है कि जांच में सभी दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे.