
चार महीने के लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व एक बार फिर पर्यटकों के लिए खुल गया है. रविवार, 1 नवंबर से यहां नए पर्यटन सत्र की शुरुआत हुई. प्रदेश के वन मंत्री अरुण सक्सेना ने हवन-पूजन के बाद सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. पहले दिन स्कूली बच्चों और विशेष अतिथियों को निशुल्क जंगल सफारी कराई गई.
इस बार पर्यटकों के लिए कई नई सुविधाएं शुरू की गई हैं. इनमें ऑनलाइन बुकिंग, अनुभवी नेचर गाइड और ठहरने के बेहतर इंतजाम शामिल हैं. खास बात यह रही कि पहले ही दिन देश के प्रसिद्ध वन्यजीव फिल्मकार सुब्बैया नल्लामुथु भी पीलीभीत के जंगल पहुंचे. हालांकि, हाल में हुई बारिश के कारण फिलहाल कुछ चुनिंदा रास्तों पर ही सफारी कराई जा रही है.
ऑनलाइन बुकिंग और 15 नेचर गाइड का इंतजाम
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इस पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटकों की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया गया है. जंगल की जानकारी देने के लिए 15 अनुभवी नेचर गाइड तैनात किए गए हैं. ये पर्यटकों को वन्यजीवों की गतिविधियों, जंगल की विशेषताओं और जैव विविधता से परिचित कराएंगे.
पर्यटकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी शुरू की गई है. अब घर बैठे अपनी पसंद की तारीख के लिए सफारी वाहन और उपलब्ध सरकारी गेस्ट हाउस बुक किए जा सकेंगे.

पिछले पर्यटन सत्र में कई पर्यटक दूर-दराज से पहुंचते थे, लेकिन सफारी वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ता था. ऑनलाइन बुकिंग से इस समस्या को कम करने की कोशिश की गई है.
DFO मनीष सिंह के मुताबिक, पहले दिन करीब 10 सफारी गाड़ियों की बुकिंग हुई. चूका, महोफ और बरही में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है. चूका बीच की हट्स, वाटर हट्स और बंबू हट्स का रंग-रोगन कर उन्हें नया रूप दिया गया है.
वीकेंड पर सफारी की फीस में होगी बढ़ोतरी
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर पी.पी. सिंह ने बताया कि शनिवार और रविवार को पर्यटकों की अधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टिकट या सफारी फीस में थोड़ी बढ़ोतरी की गई है. इसका उद्देश्य वीकेंड पर जंगल में भीड़ और जाम की स्थिति से बचाना है.
जंगल के भीतर प्लास्टिक और पॉलिथीन ले जाने पर रोक लगाई गई है. इसके लिए पेपर बैग की व्यवस्था की गई है. ठंड, कोहरे और अंधेरे को देखते हुए सफारी के समय में जरूरत के अनुसार बदलाव किया जा सकेगा. इसका फैसला पीलीभीत टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन करेगा.

फील्ड डायरेक्टर के मुताबिक, ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजर्व, बर्ड सेंचुरी, नेशनल पार्क और चिड़ियाघरों की बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है.
पहले दिन पहुंचे 5 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके नल्लामुथु
नए पर्यटन सत्र के पहले दिन एक खास मेहमान भी पीलीभीत के जंगल पहुंचे. वन्यजीव फिल्मकार और फोटोग्राफर सुब्बैया नल्लामुथु अपनी बड़ी जीप और विशेष कैमरा उपकरणों के साथ सफारी करते नजर आए. वह बाघों और जंगलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं. उन्हें पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है.

उनकी चर्चित फिल्मों में बाघिन मछली पर आधारित फिल्में भी शामिल हैं. पीलीभीत टाइगर रिजर्व की जैव विविधता और तराई के प्राकृतिक वातावरण को देखते हुए उनका यहां पहुंचना खास माना जा रहा है.
कार्यक्रम में मौजूद वन्यजीव फोटोग्राफर लालू माथुर ने बताया कि तराई क्षेत्र में जंगल, साल के वन और घास के मैदान जैसी अलग-अलग प्राकृतिक विशेषताएं हैं. यहां गैंडा, हाथी, बाघ और डॉल्फिन जैसी प्रजातियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूरे तराई क्षेत्र पर फिल्म बनाने की योजना की बात कही.
ऐतिहासिक स्थलों को भी पर्यटन से जोड़ने की मांग
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की लोकप्रियता बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं. लोगों का कहना है कि पर्यटन को सिर्फ जंगल सफारी और चूका बीच तक सीमित नहीं रखना चाहिए. पीलीभीत शहर और आसपास के धार्मिक तथा ऐतिहासिक स्थलों को भी पर्यटन के नक्शे पर लाया जाना चाहिए.
स्थानीय लोगों की मांग है कि जंगल सफारी के लिए आने वाले पर्यटक गौरीशंकर मंदिर, ऐतिहासिक जामा मस्जिद और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जुड़े स्थलों तक भी पहुंचें. इससे शहर के बाजारों, होटल, परिवहन और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है.
वरिष्ठ पत्रकार नवीन अग्रवाल ने कहा कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन केंद्र और बेहतर सुविधाओं की जरूरत है. दूर-दराज से आने वाले सैलानियों के लिए अच्छी हाईवे कनेक्टिविटी भी जरूरी है.
बारिश के बाद फिलहाल चुनिंदा रास्तों पर ही सफारी
पीलीभीत के जंगल में ठंडी हवाएं, नहरों का पानी, पक्षियों की आवाज और हरियाली पर्यटकों को आकर्षित कर रही है. चूका बीच पर बने मचान से जंगल का नजारा देखने का अपना अलग अनुभव है.
हालांकि, दो दिन पहले हुई बारिश के कारण जंगल के कई हिस्सों में पानी भर गया है. ऐसे में फिलहाल चूका मार्ग और कुछ चुनिंदा रास्तों पर ही सफारी कराई जा रही है. रास्तों की स्थिति बेहतर होने के बाद सफारी का दायरा बढ़ाया जाएगा.
इस बार जंगल के आसपास ठहरने के विकल्प भी बढ़े हैं. सरकारी गेस्ट हाउस के अलावा निजी होमस्टे और रिजॉर्ट भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं.
बाघ दिखे या न दिखे, जंगल का अनुभव ही खास
पर्यटकों का कहना है कि पीलीभीत के जंगल की हरियाली, नहरों और पेड़ों के बीच से गुजरने वाला रास्ता अपने आप में खास अनुभव देता है. यहां बाघ दिखना ही सफारी की सफलता नहीं है, बल्कि जंगल की जैव विविधता और प्राकृतिक वातावरण भी लोगों को आकर्षित करता है.
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के अलावा हिरण, तेंदुए, अजगर और कई प्रजातियों के पक्षी व अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं. चूका बीच, शारदा नदी और तराई का प्राकृतिक वातावरण इस क्षेत्र को खास बनाता है.
चार महीने बाद सफारी शुरू होने से पीलीभीत के पर्यटन कारोबार को नई उम्मीद मिली है. अब चुनौती यह है कि जंगल के साथ शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन से जोड़कर सैलानियों के ठहरने की अवधि बढ़ाई जाए, ताकि स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिल सके.