
यूपी के सहारनपुर में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार मियाजाकी आम (Miyazaki Mango) ने किसान संदीप चौधरी की मेहनत को नई पहचान दिलाई है. गुजरात के सूरत निवासी व्यापारी प्रवीण गुप्ता ने किसान संदीप से सिर्फ चार मियाजाकी आम, यानी एक किलो आम, ₹2 लाख 11 हजार में खरीदे हैं. बताया जा रहा है कि भारत में पहली बार किसी खरीदार ने मियाजाकी आम के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाई है. खास बात यह है कि प्रवीण गुप्ता ने यह आम अपनी मां के नाम पर खरीदा है.
किसान संदीप चौधरी ने बताया कि इस आम की डील पहले ₹3.5 लाख में तय हुई थी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि खरीदार यह आम अपनी मां को समर्पित करना चाहते हैं, तो उन्होंने कीमत घटाकर ₹2 लाख 11 हजार कर दी. सौदे के तहत ₹1 लाख 11 हजार ऑनलाइन मिल चुके हैं, जबकि शेष ₹1 लाख आम की डिलीवरी के समय 1 अगस्त को दिए जाएंगे. इससे पहले पिछले वर्ष भी प्रवीण गुप्ता आम खरीदना चाहते थे, लेकिन तब किसान ने यह आम मुख्यमंत्री को भेजे थे.
संदीप चौधरी का कहना है कि उन्होंने तीन साल पहले मियाजाकी आम की खेती इस सोच के साथ शुरू की थी कि किसान पारंपरिक खेती के साथ महंगी और विशेष फसलों की ओर भी बढ़ें, ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके. उन्होंने बताया कि कई लोगों ने शुरुआत में उनका मजाक उड़ाया और कहा कि आम लाखों रुपये में नहीं बिक सकता, लेकिन आज उनकी मेहनत रंग लाई. किसान ने यह भी घोषणा की कि इस बिक्री से मिली राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा गरीबों की मदद के लिए खर्च करेंगे. वर्तमान में उनके पास मियाजाकी आम के करीब 40 पेड़ हैं.
मियाजाकी आम अपनी अनोखी लाल-बैंगनी रंगत, बेहतरीन स्वाद और उच्च पोषण गुणों के कारण दुनिया का सबसे महंगा आम माना जाता है. इसमें सामान्य आमों की तुलना में अधिक विटामिन-ए, विटामिन-सी, बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. किसान संदीप चौधरी ने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे पारंपरिक खेती के साथ ऑर्गेनिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती अपनाएं. उनका मानना है कि खेती में बदलाव और नई तकनीक ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी रास्ता है.

किसान ने कहा- "मेरा नाम संदीप चौधरी है, मैं ग्राम थरोली का रहने वाला हूं. हमने अपने 4 आम सूरत के एक बहुत बड़े व्यापारी प्रवीण गुप्ता जी को 2,11,000 रुपये में बेचे हैं. सबसे खास बात यह है कि गुप्ता जी ने ये महंगे आम अपनी मां के नाम पर खरीदे हैं. जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कहते हैं 'एक पेड़ मां के नाम', ठीक उसी तरह उन्होंने यह आम अपनी माता जी के नाम लिया है. हमारी मुलाकात गुजरात में होगी, जहां हम उन्हें ये आम सौंपेंगे.'
बकौल संदीप- 'जिस आम के पेड़ मैं पिछले 3 साल से लगा रहा था, लोग उसे मजाक समझते थे. लेकिन आज जब मुझे इसका फल मिला है, तो बेहद खुशी हो रही है. मेरे पास ऐसे 40 पेड़ हैं और पहली बार मेरे 4 आम 2,11,000 रुपये में बिके हैं. मुझे 1,11,000 रुपये ऑनलाइन मिल चुके हैं और बाकी के 1 लाख रुपये डिलीवरी के वक्त मिलेंगे. इस कमाई का 10% हिस्सा मैं गरीबों की मदद में लगाऊंगा. मैं किसानों से कहना चाहता हूं कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब हमें ऑर्गेनिक खेती भी अपनानी होगी. अगर हम सिर्फ धान और गन्ने तक ही सीमित रहेंगे, तो हमारी आय कभी नहीं बढ़ पाएगी. आय बढ़ाने के लिए ऑर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ना बेहद जरूरी है.'