
कानपुर के कल्यानपुर में चर्चित कारोबारी विनीत मिनोचा की 5 सितंबर की रात उनके अपने ही घर में तकिये से मुंह दबाकर और चाकू से हमला कर हत्या कर दी गई. आरोप है कि इस खौफनाक वारदात को उनके बेटे सुब्रत ने अपने साथी विशाल के साथ मिलकर अंजाम दिया. आरोपी बेटा 40 लाख रुपये के कर्ज के दलदल में फंसा था और उसे पिता के कथित अवैध संबंधों के कारण संपत्ति हाथ से निकलने का डर सता रहा था. भारी-भरकम ईएमआई चुकाने और जायदाद पर मालिकाना हक सुरक्षित करने के लिए डुप्लीकेट चाबी से घर में घुसकर इस पूरी साजिश को पूरा किया गया.
40 लाख का कर्ज और हर महीने ईएमआई का तनाव
पुलिस पूछताछ में आरोपी सुब्रत ने कबूला कि उस पर लगभग 40 लाख रुपये का कर्ज चढ़ चुका था. हर महीने उसे 55,000 से 56,000 रुपये की किश्त देनी पड़ती थी, जबकि पिता से खर्च के लिए केवल 40,000 रुपये ही मिलते थे. इस अंतर को पूरा करने के लिए वह नया लोन लेता, क्रेडिट कार्ड स्वाइप करता और अपनी ही दुकान से सामान चोरी कराता था.
5 सितंबर की रात का खौफनाक प्लान
हत्याकांड को अंजाम देने के लिए घर की डुप्लीकेट चाबी बनवाई गई थी. 5 सितंबर की रात परिवार के बाहर जाने के समय साथी को अंदर छिपा दिया गया. खाना खाकर सोए विनीत मिनोचा के पैर एक आरोपी ने पकड़े और दूसरे ने तकिये से मुंह दबा दिया. इसी दौरान आंख खुलने पर शोर मचाने पर विशाल ने चाकू से हमला कर दिया.
बहू शालू को फंसाने की रची गई थी साजिश
सुब्रत ने नौकर विशाल को पहले ही हिदायत दी थी कि पकड़े जाने पर भाभी शालू का नाम ले लेना. शुरुआत में पुलिस का शक भी शालू पर था. पुलिस के सामने आमने-सामने बैठाए जाने पर शालू 20 मिनट तक फूट-फूटकर रोती रही और खुद को बेकसूर बताती रही. बाद में गिल्ट के कारण सुब्रत ने खुद जुर्म कबूल कर लिया.

अवैध संबंध और संपत्ति हाथ से निकलने का डर
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि पिता के अन्य औरतों के साथ संबंध थे और वे उन पर लाखों रुपये खर्च करते थे. परिवार को डर था कि कहीं वे किसी महिला को घर न ले आएं या अपनी संपत्ति उसके नाम न कर दें. फिलहाल कल्यानपुर थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
पूछताछ में आरोपी ने क्या कुछ बताया?
सवाल: पिता को क्यों मारना चाहते थे?
जवाब: पिताजी 'लूज कैरेक्टर' के आदमी थे. उनके कई औरतों के साथ अवैध संबंध थे. हमें डर था कि कहीं वह किसी और महिला को घर न ले आएं या और कुछ न कर जाएं. हमें यह भी चिंता सता रही थी कि कहीं इस वजह से हमारी संपत्ति हाथ से न निकल जाए.
सवाल: कुल कितना कर्जा है?
जवाब: सब मिलाकर लगभग 40 लाख रुपये.
सवाल: महीने में किश्त कितनी जाती थी, पिता खर्च के लिए कितना देते थे?
जवाब: महीने की लगभग 55 से 56 हजार की किश्त जाती थी. खर्च के लिए हर महीने 40 हजार ही मिलते थे.
सवाल: किश्त के लिए बाकी पैसे कहां से जुगाड़ करते थे?
जवाब: नया लोन लेता या क्रेडिट कार्ड स्वाइप करता. कभी-कभी अपनी ही दुकान से सामान चोरी.