राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब हादसे से जुड़े कई गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग लगने के दौरान बिल्डिंग का मैन गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया था, जिसके कारण अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल सका. आरोप है कि इमारत में आपातकालीन निकास द्वार यानी इमरजेंसी एग्जिट की भी व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई.
बताया जा रहा है कि जिस भवन में आग लगी, वह वीरेंद्र शुक्ला से जुड़ा हुआ है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर भवन बना है वह वीरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज है, जबकि भवन का स्वीकृत नक्शा सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम पर बताया जा रहा है. वीरेंद्र शुक्ला को रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का मालिक बताया जा रहा है.
घटना के बाद सामने आए विवरण के अनुसार भवन में संचालित कार्यालय का मुख्य गेट बायोमेट्रिक थंब इम्प्रेशन सिस्टम से संचालित होता था. आग लगने के बाद गेट लॉक हो गया और अंदर मौजूद लोग बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते रहे. लोगों का आरोप है कि इमारत में इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, जिसके कारण सुरक्षित निकासी संभव नहीं हो सकी.
ऑटोमैटिक लॉक गेट बना मौत का जाल
आग और धुएं के बीच जब नीचे उतरने का रास्ता नहीं मिला तो कई लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों का सहारा लिया. कुछ लोगों ने खिड़कियों से छलांग लगाई, जबकि कई लोग धुएं की चपेट में आने के कारण बेहोश हो गए और बाहर नहीं निकल सके. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है. अलीगंज थाने में इस मामले को लेकर तहरीर दी गई है. शिकायत के आधार पर केस दर्ज किए जाने की प्रक्रिया चल रही है. तहरीर में वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला को नामजद किया गया है. घटना के बाद दोनों फोन बंद कर फरार बताए जा रहे हैं.
अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने अपने निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और मामले को लेकर मुख्यमंत्री आवास पर हाई लेवल बैठक बुलाई. बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और फायर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री इस घटना को लेकर नाराज हैं और उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. बैठक में अग्निशमन मानकों, भवन की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण संबंधी सभी पहलुओं की समीक्षा की गई. साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि भवन में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं.
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, सख्त कार्रवाई के संकेत
प्रशासन अब भवन की सुरक्षा व्यवस्थाओं, स्वीकृत मानचित्र, फायर सेफ्टी इंतजाम और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रहा है. वहीं अग्निकांड वाली इमारत पर भी जल्द कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.