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शाम 7 बजे खुलता था ऑफिस, रात 3 बजे होता था बंद... लखनऊ में MNC नहीं, विदेशियों को ठगने वाली कंपनी चल रही थी!

बाहर से कांच की चमचमाती बिल्डिंग... अंदर सैकड़ों लैपटॉप, अंग्रेजी में फर्राटेदार बात करने वाले कर्मचारी और रात की शिफ्ट... पहली नजर में लगेगा कोई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है. लेकिन पुलिस का दावा है कि यहां नौकरी नहीं, ठगी हो रही थी. लखनऊ के समिट बिल्डिंग में छापा पड़ा तो 119 लोग मिले, 100 लैपटॉप और 178 मोबाइल बरामद हुए. आरोप है कि यहां से अमेरिकी नागरिकों समेत विदेशियों को कॉल कर उनके बैंक खाते खाली किए जाते थे.

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ऑफिस चलाने में आता था 3 करोड़ का खर्च. (Photo: ITG)
ऑफिस चलाने में आता था 3 करोड़ का खर्च. (Photo: ITG)

अगर आपको कोई कहे कि नौकरी शाम 7 बजे शुरू होगी, रात 3 बजे खत्म होगी, सैलरी 25 हजार और इंसेंटिव मिलाकर एक लाख रुपये तक कमाई होगी... तो शायद आप भी सोचें कि कोई विदेशी कंपनी होगी. लेकिन लखनऊ में ऐसा ही एक ऑफिस पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी का अड्डा निकला.

मामला विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग का है. यहां Solaris Solution नाम से दो बड़े ऑफिस किराए पर लिए गए थे. पुलिस के मुताबिक, ऑफिस में दिनभर सन्नाटा रहता था, लेकिन शाम होते ही पूरा फ्लोर एक्टिव हो जाता था. रात 7 बजे से विदेशी नागरिकों को कॉल करने का सिलसिला शुरू होता और सुबह 3 बजे तक चलता था.

क्राइम ब्रांच ने छापा मारा तो 11वीं मंजिल पर बने ऑफिस से 119 लोगों को हिरासत में लिया गया. मौके से 100 लैपटॉप, 178 कॉलिंग मोबाइल और बड़ी मात्रा में डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए. पुलिस ने ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को गिरफ्तार किया है. शुरुआती जांच में दावा किया गया है कि पूरा नेटवर्क विदेश में बैठे एक सरगना के इशारे पर चल रहा था.

lucknow fake international call centre busted 119 detained summit building

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह का निशाना मुख्य रूप से अमेरिका और दूसरे देशों के नागरिक होते थे. जब कोई व्यक्ति ऑनलाइन खरीदे गए सामान का रिफंड लेने के लिए गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजता, तो कथित तौर पर वह इन्हीं लोगों तक पहुंच जाता. इसके बाद 'टेक्निकल सपोर्ट' के नाम पर उसके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लिया जाता और बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते.

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इस कथित कॉल सेंटर में नौकरी भी आसान नहीं थी. कई राउंड का इंटरव्यू होता था. पुलिस का दावा है कि कर्मचारियों को अच्छी-खासी सैलरी के साथ ठगी की रकम का हिस्सा भी दिया जाता था. यही वजह थी कि कई कर्मचारी हर महीने 80 हजार से 1 लाख रुपये तक कमा रहे थे. जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि वे किस तरह का काम कर रहे हैं.

lucknow fake international call centre busted 119 detained summit building

पूछताछ में यह भी सामने आया कि पूर्वोत्तर राज्यों की कई युवतियों को उनकी बेहतर अंग्रेजी और विदेशी लहजे जैसी बोलचाल की वजह से रखा गया था. पुलिस का मानना है कि इसी वजह से विदेशी नागरिक आसानी से उनके झांसे में आ जाते थे. अब पुलिस बरामद लैपटॉप, मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच करा रही है. साथ ही विदेश में बैठे कथित मास्टरमाइंड और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है.

पकड़े गए युवक के परिजन बोले- बेटे ने मुश्किल से पाई थी नौकरी

यहां लोगों को 'डॉलर ऐप' और टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर चूना लगाया जाता था. पकड़े गए एक युवक के परिजनों ने बताया कि उनके बेटे ने 5 कठिन राउंड का इंटरव्यू क्लियर करने के बाद यह नौकरी हासिल की थी. वो लंबे समय से बेरोजगार था और उसे लगा कि उसे एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब मिल गई है.

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यहां काम करने वालों की फिक्स सैलरी 25 से 28 हजार रुपये थी. लेकिन असली खेल इंसेंटिव का था. ठगी की रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों को बोनस के रूप में मिलता था, जिसके चलते हर कर्मचारी महीने के 80 हजार से 1 लाख रुपये तक कमा रहा था. 

lucknow fake international call centre busted 119 detained summit building

ठगी का मॉड्यूल बेहद शातिर था. जब कोई विदेशी नागरिक ऑनलाइन शॉपिंग के बाद सामान पसंद न आने पर रिफंड के लिए गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च करता, तो ये जालसाज टेक-सपोर्ट के जरिए उनका डेटा चुरा लेते थे. इसके बाद तुरंत उन्हें बैक कॉल की जाती थी. मदद करने के बहाने पीड़ित के सिस्टम का रिमोट एक्सेस लिया जाता और ओटीपी भेजकर पूरा खाता साफ कर दिया जाता था.

ऑफिस चलाने में 3 करोड़ का आ रहा था खर्च

समिट बिल्डिंग का किराया, मेंटेनेंस और अन्य तामझाम मिलाकर यह गिरोह साल का करीब 3 करोड़ रुपये सिर्फ ऑफिस चलाने में खर्च कर रहा था. पिछले एक साल से यह खेल धड़ल्ले से चल रहा था. विदेशी एजेंसी से मिली इनपुट और शिकायत के बाद लखनऊ पुलिस एक्टिव हुई और इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. एडीसीपी किरण यादव का कहना है कि यह एक बड़ा इंटरनेशनल नेटवर्क है. फरार मुख्य सरगना और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.

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