लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र में 4 मार्च को होली के दिन यूपी एसटीएफ के अंडर ट्रेनिंग अफसर शक्ति सिंह के साथ नशे में धुत दबंग अभय वर्मा और उसके साथियों ने मारपीट और लूटपाट की. शक्ति सिंह बीएसएनएल कॉलोनी के पास से अपने मित्र के घर जा रहे थे, तभी बाइक सवार आरोपियों ने उनकी कार के आगे गाड़ी लगाकर हमला कर दिया.
अफसर ने अपना परिचय भी दिया, लेकिन आरोपियों ने उनकी एक न सुनी. स्थानीय अलीगंज इंस्पेक्टर अशोक सोनकर ने पीड़ित की मदद करने के बजाय उन्हें ही नशे में बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की. आखिर में अब आला अफसरों के हस्तक्षेप के बाद आरोपियों पर एफआईआर दर्ज हुई और लापरवाह इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर किया गया.
इंस्पेक्टर और अपराधी की मिलीभगत उजागर
जांच में सामने आया कि इंस्पेक्टर अशोक सोनकर और मुख्य आरोपी अभय वर्मा पुराने परिचित थे. इंस्पेक्टर ने अभय को बचाने के लिए उसके वकील से सरेंडर न करने की सलाह दी थी ताकि उसे जेल न जाना पड़े. अशोक सोनकर जांच अधिकारियों से झूठ बोलते रहे कि वह अभय को नहीं जानते. इस मिलीभगत और हीलाहवाली के सबूत मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाते हुए इंस्पेक्टर अशोक सोनकर को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है.
इनामी बदमाश है मुख्य आरोपी अभय वर्मा
मुख्य आरोपी अभय वर्मा का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. वह लखनऊ का इनामी बदमाश रह चुका है और श्रवण साहू हत्याकांड के मुख्य आरोपी अकील अंसारी का करीबी साथी है. कृष्णानगर के ज्वेलर्स के अपहरण और हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी उसका नाम आ चुका है. फिलहाल, पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर अभय वर्मा और उसके तीन अज्ञात साथियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें छापेमारी कर रही हैं. पुलिस जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने का दावा कर रही है.