झांसी के मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम धौरा की रहने वाली राजाबाई 7 अक्टूबर को अपनी शिकायत लेकर SDM कार्यालय पहुंचीं. वहां उन्होंने अधिकारियों से कहा- 'साहब, मैं जिंदा हूं.' राजाबाई के मुताबिक, उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी. उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और रोजमर्रा के खर्च के लिए यही पेंशन बड़ा सहारा थी. महिला का कहना है कि पेंशन की तीन किस्तें मिलने के बाद अचानक पैसा आना बंद हो गया. पहले उन्हें लगा कि शायद किसी तकनीकी वजह से पेंशन रुकी होगी. लेकिन जब उन्होंने इसकी जानकारी की तो जो बात सामने आई, उसने उन्हें परेशान कर दिया.
सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया था. यानी राजाबाई हकीकत में अधिकारियों के सामने खड़ी थीं, लेकिन कागजों में उनकी 'मौत' हो चुकी थी. अब सवाल था कि आखिर उन्हें मृत किसने दर्ज किया? और बिना मौके पर आए यह कैसे पता चल गया कि महिला अब इस दुनिया में नहीं हैं?

राजाबाई ने आरोप लगाया कि उन्हें मृत दर्ज करने से पहले सही तरीके से जांच नहीं की गई. उनका कहना है कि अगर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी मौके पर आकर उनकी स्थिति देखते तो उन्हें आसानी से पता चल जाता कि जिस महिला को रिकॉर्ड में मृत बताया जा रहा है, वह जीवित है.
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राजाबाई का कहना है कि पेंशन बंद होने के बाद उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ गई है. उम्र ज्यादा होने की वजह से उनके लिए काम करना भी आसान नहीं है. इसलिए वह चाहती हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी स्थिति तुरंत ठीक की जाए और पेंशन फिर से शुरू की जाए.
राजाबाई की शिकायत अब अधिकारियों के पास पहुंच चुकी है. मऊरानीपुर के SDM मनोज कुमार भारती ने बताया कि 7 अक्टूबर को ग्राम धौरा की रहने वाली राजाबाई दफ्तर में शिकायत लेकर आई थीं. महिला ने बताया कि उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई है और रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शाया गया है, जबकि वह जीवित हैं. SDM के मुताबिक, महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा गया है. अब मामले की जांच कराई जा रही है. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
राजाबाई के सामने खड़े होकर अपनी जिंदगी का सबूत देने के बाद मामला सिर्फ पेंशन शुरू होने तक सीमित नहीं रह जाता. सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में एक जीवित महिला को मृत दर्ज कैसे कर दिया गया? किस स्तर पर यह गलती हुई? क्या रिकॉर्ड अपडेट करने से पहले कोई सत्यापन किया गया था? और अगर सत्यापन हुआ था तो फिर राजाबाई तक वह जांच पहुंची क्यों नहीं? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे.