उत्तर प्रदेश के झांसी में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक महिला की मौत के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां गेट पर ताला लगा मिला. श्मशान घाट का चौकीदार ताला लगाकर शादी में चला गया था. ऐसे में दुखी परिजनों को शव के साथ करीब 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ा. इस दौरान गुस्साए परिजनों ने शव सड़क पर रख दिया, जिससे जाम लग गया.
डिलीवरी के बाद बिगड़ी महिला की तबीयत, रास्ते में हुई मौत
मामला झांसी के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के लहर गिर्द का है. यहां रहने वाले संतोष अहिरवार की 33 वर्षीय पत्नी पूनम की सोमवार दोपहर तीसरी डिलीवरी हुई थी. परिजनों के मुताबिक, डिलीवरी के कुछ समय बाद पूनम की तबीयत बिगड़ने लगी. हालत गंभीर होने पर उसे ग्वालियर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.
इसके बाद परिजन शव को घर लेकर पहुंचे. परिवार में मातम पसरा हुआ था और अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही थी. शाम करीब 7 बजे परिजन शव लेकर पहुज नदी के पास स्थित श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां का गेट बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था.
शादी में गया था चौकीदार, 3 घंटे तक नहीं खुला ताला
परिजनों का कहना है कि उन्होंने श्मशान घाट के चौकीदार को पहले ही सूचना दे दी थी कि वे अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर आ रहे हैं. इसके बावजूद जब वे वहां पहुंचे तो गेट पर ताला लगा मिला.
आसपास जानकारी करने पर पता चला कि चौकीदार ताला लगाकर शादी में शामिल होने चला गया है. परिजनों को बताया गया कि वह जल्द वापस आ जाएगा, लेकिन काफी देर तक उसका इंतजार करने के बाद भी वह नहीं पहुंचा. पत्नी की मौत से पहले ही दुखी परिवार का धैर्य जवाब दे गया. गुस्साए परिजनों ने शव को सड़क पर रख दिया, जिससे वहां जाम लग गया.
सड़क पर शव रखकर किया विरोध, पुलिस ने खुलवाया जाम
घटना की सूचना मिलने पर सीपरी बाजार थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने गुस्साए परिजनों को किसी तरह शांत कराया और सड़क से शव हटवाकर जाम खुलवाया.
इसके बाद परिजन शव को श्मशान घाट के गेट पर रखकर चौकीदार का इंतजार करने लगे. करीब 3 घंटे बाद चौकीदार मौके पर पहुंचा और गेट का ताला खोला गया. इसके बाद कहीं जाकर पूनम का अंतिम संस्कार हो सका.
पुलिस ने क्या बताया?
सीपरी बाजार थाना प्रभारी जेपी चौबे ने बताया कि श्मशान घाट का चौकीदार झांसी के बबीना में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने गया था. उसे वहां से बुलवाया गया, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार कराया गया.
इस घटना ने श्मशान घाट जैसी जरूरी सार्वजनिक व्यवस्था में जिम्मेदारी और वैकल्पिक इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुख की घड़ी में परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा.