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गोरखपुर में 147 किलो की प्रेग्नेंट मछली... नेपाल से भटककर नहर में आ फंसी, 52 KM का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नदी में छोड़ी गई डॉल्फिन

Gorakhpur News: महराजगंज के कैनाल में फंसी नेपाल की 147 kg की प्रेग्नेंट डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू. 52 किमी का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 65 मिनट में राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ा गया. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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नेपाल की त्रिवेणी नदी से बहकर आई डाल्फिन मछली.(Photo:ITG)
नेपाल की त्रिवेणी नदी से बहकर आई डाल्फिन मछली.(Photo:ITG)

नेपाल की त्रिवेणी नदी से महराजगंज जिले के एक कैनाल में बहकर आई 147 किलो की डॉल्फिन मछली का रेस्क्यू चर्चा में है. प्रेग्नेंट मछली को राप्ती नदी में छोड़ा गया. डॉल्फिन को सुरक्षित गोरखपुर लाने के लिए भटहट से 52 किलो के रास्ते में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. तकरीबन 1 घंटे के सफर के बाद डॉल्फिन को गोरखपुर के राप्ती तट पर लाकर इलाज के बाद राप्ती नदी में छोड़ दिया गया.

गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणी उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश कुमार सिंह ने बताया, नेपाल की त्रिवेणी नदी से एक डॉल्फिन भटककर एक कैनाल में आ गई और वह धीरे-धीरे परतावाल के पास धरमौली बाजार के कैनाल में आकर फंस गई थी. वह वहां 3 दिन से फंसी थी और उसकी जान को बचाना बहुत ही जरूरी था.

मछली को पकड़ने की कोशिश हुई फेल

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उत्तर प्रदेश अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बीसी ब्रम्हा के निर्देशन में डॉल्फिन को रविवार यानी 19 जुलाई को भी पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन बारिश के कारण कैनाल में पानी ज्यादा था और बहाव भी बहुत तेज होने के कारण बहुत ही कठिनाई हो रही थी.

ऐसे में सिंचाई विभाग के आलाधिकारियों से बात करके कैनाल में पानी को कम कराया गया और सोमवार (20 जुलाई) को कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज के तहत सिसवां शुक्ल ग्रामसभा के पास देवरिया कैनाल से सफल रेस्क्यू किया गया. देखें VIDEO:- 

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रेस्क्यू के बाद डॉलफिन को डॉलफिन एंबुलेंस में रखा गया. जहां इलाज और जांच किया गया. 7 फीट 2 इंच लंबी डॉल्फिन 147 किलो की प्रेग्नेंट मादा है. एंबुलेंस के जरिए ही मछली को राजघाट के पास राप्ती नदी में छोड़ा जाना था, क्योंकि राप्ती नदी डॉल्फिन के लिए एक सुरक्षित घर है. 

गोरखपुर SSP डॉक्टर कौस्तुभ के आदेश पर डॉल्फिन को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. देखें VIDEO:- 

इसके चलते राप्ती घाट तक कुल दूरी करीब 52 किमी को तय करने में मात्र एक घंटा 5 मिनट लगे और मछली को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया.

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