अदालतों में आमतौर पर कानून, दलील और मुकदमों की चर्चा होती है. लेकिन गाजियाबाद जिला कचहरी में इन दिनों एक ऐसी दोस्ती चर्चा में है, जो न किसी तारीख की मोहताज है और न किसी मुकदमे की. यहां पिछले कुछ साल से एक बंदर रोजाना एक अधिवक्ता के चेंबर में पहुंचता है. कुछ देर उनकी मेज पर बैठता है, रोटी का इंतजार करता है और रोटी मिलते ही वहां से चला जाता है. इस अनोखी दोस्ती का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
वीडियो में बंदर कभी अधिवक्ता की मेज पर बैठा दिखाई देता है तो कभी उनकी जेब से रोटी निकालने की कोशिश करता नजर आता है. अधिवक्ता भी उसे डांटने के बजाय प्यार से रोटी खिलाते हैं. कचहरी आने वाले लोगों के लिए यह नजारा अब किसी रोजमर्रा की कहानी से कम नहीं है.
गाजियाबाद जिला कचहरी में अधिवक्ता महेश यादव पिछले करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे हैं. वह पूर्व में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भी रह चुके हैं. रोज की तरह जब वह अपने चेंबर में बैठकर काम करते हैं तो उनका यह 'खास मेहमान' भी वहां पहुंच जाता है. बंदर बिना किसी झिझक के चेंबर में दाखिल होता है और कई बार सीधे अधिवक्ता की मेज पर जाकर बैठ जाता है. उसे देखकर महेश यादव भी समझ जाते हैं कि मेहमान किस काम से आया है. फिर शुरू होता है रोटी का इंतजार. बंदर कुछ देर तक शांत बैठा रहता है. कभी वह मेज पर इधर-उधर देखता है तो कभी अधिवक्ता की तरफ. कई बार तो वह खुद उनकी जेब टटोलकर रोटी निकालने की कोशिश करता है. इस दौरान अधिवक्ता उसे प्यार से संभालते हैं और उसके लिए रोटी निकालकर देते हैं.
रोटी मिलते ही दोस्त का काम पूरा
महेश यादव भी इस बंदर को खाली हाथ लौटाना नहीं भूलते. उनके मुताबिक, यह सिलसिला अचानक शुरू नहीं हुआ और न ही यह किसी एक-दो दिन की बात है. पिछले करीब पांच वर्षों से बंदर का उनके चेंबर में आना-जाना बना हुआ है. रोटी मिलते ही बंदर उसे लेकर चेंबर से बाहर निकल जाता है. कभी वह वहीं बैठकर रोटी खाता है तो कभी रोटी लेकर दूसरी जगह चला जाता है. खास बात यह है कि बंदर को भी जैसे अपने 'दोस्त' के आने का समय पता हो. महेश यादव कचहरी में होते हैं तो बंदर उनके चेंबर तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि कचहरी के कई लोगों के लिए अब यह नजारा अनजान नहीं रहा.
जिस दिन वकील नहीं आते, तब भी चेंबर के आसपास मंडराता है
इस दोस्ती की सबसे दिलचस्प बात यह बताई जाती है कि जिस दिन किसी वजह से महेश यादव कचहरी नहीं पहुंचते, उस दिन भी बंदर उनके चेंबर के आसपास दिखाई देता है. यानी बंदर के लिए यह सिर्फ रोटी का रिश्ता है या उसे अधिवक्ता से वास्तव में लगाव हो गया है, यह कहना मुश्किल है. लेकिन पांच साल से लगातार चले आ रहे इस सिलसिले ने वहां मौजूद लोगों को जरूर हैरान किया है. अगले दिन महेश यादव कचहरी पहुंचते हैं तो बंदर फिर उनके पास आ जाता है. जैसे पिछली मुलाकात अधूरी रह गई हो और अब उसे पूरा करने आया हो.
कभी जेब टटोलता है, कभी सामने बैठ जाता है
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बंदर का व्यवहार लोगों का ध्यान खींच रहा है. वह अधिवक्ता की मेज पर आराम से बैठा नजर आता है. कभी उनकी तरफ देखता है तो कभी उनकी जेब की ओर हाथ बढ़ाता है. महेश यादव भी उसके इस व्यवहार पर नाराज होने के बजाय प्यार से उसे रोटी देते हैं. कई मौकों पर वह बंदर के सिर पर हाथ फेरते हुए भी नजर आते हैं. कचहरी में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य खासा दिलचस्प है. जहां रोज लोग अपने मुकदमों और कानूनी काम के लिए पहुंचते हैं, वहीं इस चेंबर में रोज आने वाला यह बेजुबान मेहमान माहौल को कुछ पल के लिए हल्का कर देता है.
30 साल की वकालत के बीच पांच साल पुरानी दोस्ती
महेश यादव करीब तीन दशक से कचहरी में वकालत कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने अदालत में हजारों मामलों की पैरवी की होगी, लेकिन उनके चेंबर में आने वाला यह बंदर अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. पांच साल पहले शुरू हुआ यह सिलसिला कब दोस्ती में बदल गया, इसका कोई एक दिन तय नहीं है. लेकिन अब बंदर का चेंबर में आना और रोटी लेकर जाना वहां की रोजमर्रा की तस्वीर बन चुका है. महेश यादव के लिए भी यह महज किसी जानवर को खाना खिलाने की बात नहीं लगती. वह उसके आने पर उसे रोटी देते हैं और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हैं.