यूपी के आजमगढ़ जिले में मंगलवार शाम ऐसा हत्याकांड हुआ जिसने पूरे पूर्वांचल को दहला दिया. यहां महामृत्युंजय अनुष्ठान के चौथे दिन आरोपी अरविंद सिंह ने पहचान पत्र मांगने को लेकर हुए विवाद के बाद अपनी पत्नी बबीता, पंडित महेंद्र पाठक और पंडित अखिलेश मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी. घटना के वक्त मौजूद अखिलेश मिश्रा के बेटे व चश्मदीद पंडित हिमांशु मिश्रा ने दीवार फांदकर अपनी जान बचाई, जबकि आरोपी ने अपने बच्चों को बंधक बना लिया जिसे बाद में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में ढेर कर दिया.
पूजा के आखिरी समय अचानक बदला व्यवहार
मीडिया से बात करते हुए चश्मदीद हिमांशु मिश्रा ने बताया कि घर में पांच दिनों का अनुष्ठान चल रहा था, जिसका उद्देश्य परिवार की बाधा दूर करना था. अरविंद दिनभर शांत था लेकिन शाम को पूजा खत्म होने पर उसने अभद्र भाषा में पंडितों से पहचान पत्र मांगना शुरू कर दिया. पहचान पत्र न होने पर उसने जान से मारने की धमकी दी और विरोध करने पर लाठी और पिस्तौल निकाल ली.
पत्नी को गोली मारने के बाद पंडितों पर चलाईं गोलियां
हिमांशु के अनुसार, जैसे ही अरविंद ने पिस्तौल तानी तो उसकी पत्नी बीच में आ गई, जिसे पहली गोली लगी और वह वहीं गिर पड़ी. इसके बाद आरोपी ने भाग रहे पुरोहित महेंद्र पाठक को गेट के पास पीठ पर गोली मार दी. फिर उसने हिमांशु के पिता अखिलेश मिश्रा को निशाना बनाया, जिससे उनकी मौत हो गई.
दीवार फांदकर बचाई जान, पुलिस को दी सूचना
पिता को गोली लगते ही हिमांशु किसी तरह घर की ऊंची दीवार कूदकर बाहर भागे और अपने परिजनों व ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी. इसके बाद अरविंद की भतीजी और उसकी मां कमला देवी ने डायल-112 पर फोन करके पुलिस को वारदात की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा.
पुलिस कार्रवाई में आरोपी भी ढेर
एडीजी नवीन अरोड़ा के मुताबिक, आरोपी ने खुद को कमरे में बंद कर बच्चों को बंधक बना लिया था. जब पुलिस टीम बातचीत और रेस्क्यू के लिए आगे बढ़ी, तो उसने अपने बेटे को गोली मार दी और पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी गंभीर रूप से घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई.