
देश विदेश में प्रसिद्ध सबसे उत्तम प्रजाति जमुनापारी बकरी इटावा के चंबल इलाके चकरनगर क्षेत्र में पाई जाती है. इस बकरी में विशेषताएं होने की वजह से इसको वियतनाम, जापान, बांग्लादेश सहित कई देशों में बड़ी मांग रहती है. इस प्रजाति को संरक्षित करने के लिए इटावा में एक भदावरी भैंस और जमुनापारी बकरी प्रजनन केंद्र बनाया गया है, इस पर प्रतिवर्ष इनकी प्रजाति को संरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं.
इटावा की प्रजनन केंद्र में अचानक से बकरियां में सांस लेने की दिक्कत और फेफड़ों में तकलीफ होने की वजह से 40 बकरियों की मौत हो गई है. इन मौतों से प्रशासनिक अमला परेशान हो गया है.
अचानक अज्ञात बीमारी होने की वजह से इसके सैंपल मथुरा अनुसंधान केंद्र और आईवीआरआई बरेली अनुसंधान केंद्र पर भेजे गए, लेकिन उनकी रिपोर्ट में भी वायरस का पता नहीं चल पाया, जिससे बीमारी अभी भी अज्ञात बनी हुई है.
मार्च में खरीदी गई थीं 110 बकरियां
भदावरी भैंस और जमुनापारी प्रजनन केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉक्टर डीके मिश्रा के अनुसार, मार्च माह में औरैया जनपद में लगे मेले से 50 बकरियां और पांच बकरे 65 हजार रुपए से लेकर 80 हजार रुपए की दर से खरीदे गए और इटावा में लगे मेले से भी 50 बकरी और 5 बकरों की खरीददारी की गई.

इस प्रकार से मार्च के महीने में 110 बकरा बकरी प्रजनन केंद्र लाये गए, प्रजनन केंद्र में अचानक से जून के महीने में एक अज्ञात बीमारी फैल गई, जिस कारण प्रतिदिन की संख्या के आधार से 40 बकरे बकरियां और उनके बच्चों की मृत्यु हो गई है. इससे पशुपालन विभाग परेशान हो गया. बीमारी का भी पता नहीं चल पा रहा है.
पोस्टमार्टम में भी वजह स्पष्ट नहीं
संयुक्त निदेशक डॉक्टर डीके मिश्रा ने बताया कि बीमार बकरियों का सैंपल भी भेजे गए लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आने की वजह से बीमारी नहीं पता चल पाई है, अभी भी पांच बकरियां बीमार है, जिनको अलग बाड़े में रखा गया है. उनका उपचार चल रहा है. देखें VIDEO:-
मृत बकरियों के शवों के पोस्टमार्टम भी कराये गए हैं, इसमें माइक्रो प्लाजा व अन्य बीमारियों की आशंका भी हुई है. खांसी व दम फूलने के मुख्य कारण है, इससे बकरियों की लगातार मौत हुई है. अन्य जिलों से आई टीम भी बकरियों की मौत को लेकर जांच कर रही हैं. अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है.