उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने मुखर्जी को एक महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और भारत की एकता और अखंडता का समर्थक बताया. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता की रक्षा करने और जम्मू-कश्मीर राज्य को मिले विशेष दर्जे का विरोध करने में मुखर्जी के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा.
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत माता के महान सपूत, एक प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री थे. उनकी 125वीं जयंती पर मैं उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. मुखर्जी ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के तौर पर की थी और 33 साल की उम्र में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने.
मोदी सरकार ने मुखर्जी के सपने को सच किया: CM योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुखर्जी ने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार की कथित "तुष्टिकरण की नीति" के कारण इस्तीफा दे दिया था और बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी. जम्मू-कश्मीर में परमिट सिस्टम के खिलाफ मुखर्जी के विरोध को याद करते हुए आदित्यनाथ ने उनके नारे का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि मुखर्जी को कश्मीर में गिरफ्तार किया गया था, जहां 1953 में उनकी मृत्यु हो गई. उन्होंने बताया कि मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 और देश की एकता व अखंडता को चुनौती देने वाली नीतियों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया था.
मुखर्जी का सपना सच हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने 2019 में अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि बीआर अंबेडकर द्वारा बनाया गया संविधान जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह से लागू हो सके.