अयोध्या में राम मंदिर से रामलला की भव्य पालकी यात्रा निकली. करीब 500 वर्षों बाद पहली बार रामलला झूला विहार के लिए इस तरह उत्सव यात्रा में शामिल हुए. चांदी की पालकी को फूलों से आकर्षक तरीके से सजाया गया था. शाम करीब 4 बजे गाजे-बाजे के साथ यात्रा शुरू हुई.
इस विशेष आयोजन में रामलला के साथ उनके चारों भाई भी शामिल हुए. मंदिर परिसर के करीब 70 एकड़ क्षेत्र में यह धार्मिक यात्रा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई. श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर बेहद खास रहा.
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साधु-संत भी बने यात्रा का हिस्सा
पालकी यात्रा में अयोध्या के साधु-संत और धार्मिक संत-महंत भी शामिल हुए. भव्य धार्मिक माहौल के बीच रामलला की उत्सव यात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धा और उल्लास का माहौल देखने को मिला.
चांदी की पालकी को फूलों से सजाया गया था और गाजे-बाजे के बीच यात्रा आगे बढ़ी. रामलला के साथ चारों भाइयों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और खास बना दिया.
कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित इस यात्रा को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए गए. श्रद्धालुओं के लिए यह ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन आकर्षण का केंद्र बना रहा.
500 साल बाद नई परंपरा
रामलला का झूला विहार अयोध्या के धार्मिक आयोजनों में एक महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर सामने आया है. करीब पांच शताब्दियों बाद पहली बार रामलला की पालकी यात्रा निकाले जाने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया.
इस आयोजन के जरिए रामलला को झूला विहार के लिए ले जाया गया. यात्रा में धार्मिक संतों की भागीदारी और भव्य सजावट ने पूरे आयोजन को विशेष स्वरूप दिया.