कछुआ दिखने में भले ही बेहद शांत और धीमा जानवर हो, लेकिन करनाल में इसके नाम पर चल रहे कथित अवैध कारोबार ने वन विभाग को एक्टिव कर दिया. मामला ऐसा है कि कछुए पानी में नहीं, बल्कि एक्वागार्ड के डिब्बों में छिपाकर रखे गए थे. वन विभाग को सूचना मिली थी कि करनाल में कछुओं की अवैध खरीद-फरोख्त का धंधा चल रहा है. सूचना के बाद वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने दो दुकानों पर छापा मार दिया.
इस दौरान कुल 8 जिंदा कछुए दो अलग-अलग दुकानों से मिले. अब दो लोग गिरफ्तार हैं और दोनों को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. दरअसल, करनाल में वन विभाग को जानकारी मिली थी कि शहर में कछुओं की कथित अवैध खरीद-फरोख्त हो रही है. वन विभाग ने पुलिस के साथ टीम बनाई और छापेमारी की तैयारी शुरू हुई. पहला ठिकाना था मच्छी मार्केट में एक दुकान... दूसरा ठिकाना सुभाष कॉलोनी में बताया गया. टीम दोनों जगह पहुंची. और तलाशी शुरू हुई.

आरोपियों ने कछुओं को सामने खुले में नहीं रखा था. उन्हें एक्वागार्ड के डिब्बों में छिपाकर रखा गया था. वन विभाग की टीम ने जब तलाशी ली तो वहां से कछुए बरामद हुए. दोनों जगहों से कुल 8 जिंदा कछुए मिले. कछुओं को देखकर टीम ने उन्हें कब्जे में लिया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
वन विभाग के मुताबिक, दोनों आरोपी कछुओं की खरीद-फरोख्त से जुड़े थे. अब सवाल है कि अगर कछुओं को बेचने का काम हो रहा था, तो उन्हें लाया कहां से जाता था? कौन इन्हें पकड़कर देता था? किसे बेचा जाता था? और क्या ये सिर्फ दो दुकानों तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी है? फिलहाल वन विभाग इन सभी सवालों के जवाब तलाश रहा है. जांच का फोकस कछुओं के सोर्स और संभावित खरीदारों तक पहुंचने पर है.
यह भी पढ़ें: अजब! प्रजनन के लिए 4500 KM तैरकर ओडिशा से श्रीलंका होते हुए महाराष्ट्र पहुंच गया कछुआ
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. इसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. अब आगे की जांच में ये पता लगाया जाएगा कि दोनों आरोपियों की भूमिका कितनी बड़ी थी और इस कथित कारोबार से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं.
वन विभाग के मुताबिक, कछुओं को पकड़ना, अपने पास रखना, खरीदना-बेचना या उनकी अवैध तस्करी करना कानून के तहत अपराध है. ऐसे मामलों में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत सजा का प्रावधान है.
करनाल में हुई इस कार्रवाई के बाद वन विभाग की नजर अब उन लोगों पर है, जो कथित तौर पर इस कारोबार की सप्लाई चेन का हिस्सा हो सकते हैं. बरामद 8 कछुओं को कहां से लाया गया था? उन्हें किसे बेचा जाना था? क्या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? इन सवालों का जवाब जांच के आगे बढ़ने पर मिलेगा.