रामनगरी अयोध्या में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा टल गया. अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) कार्यालय की सीढ़ियां अचानक भरभराकर टूट गईं. घटना के समय कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई. सीढ़ियां टूटने के दौरान वहां मौजूद सभी लोग सुरक्षित बच गए. हालांकि घटना ने कार्यालय की इमारत की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी शहर में भवन निर्माण की गुणवत्ता और मानकों की निगरानी करना है, उसी के कार्यालय में इस तरह का हादसा हो गया.
बैठक खत्म होते ही हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता और महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी भी कार्यालय में मौजूद थे. यहां कोचिंग एवं लाइब्रेरी संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी.
बैठक में बड़ी संख्या में कोचिंग संचालक और संस्थानों के प्रबंधक शामिल हुए थे. बैठक समाप्त होने के कुछ ही देर बाद अचानक कार्यालय की सीढ़ियां भरभराकर गिर गईं.
सीढ़ियां टूटते ही पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई. मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर खुद को बचाया. विधायक और महापौर समेत सभी लोग इस हादसे में बाल-बाल बच गए.
निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में किसी के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है. हालांकि इस घटना ने विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जिस विभाग पर पूरे शहर में भवन निर्माण के मानकों की जांच, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है, उसी के कार्यालय की सीढ़ियों का इस तरह ढह जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
घटना के बाद लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब प्राधिकरण का अपना कार्यालय ही सुरक्षित नहीं है, तो शहर में निर्माण कार्यों की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से हो रही होगी.
सचिव ने सवालों पर साधी चुप्पी
हादसे के बाद जब पत्रकारों ने अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव राजेश मिश्रा से घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
सचिव का जवाब देने से इनकार करना और मामले पर चुप्पी साध लेना भी चर्चा का विषय बन गया. इससे घटना को लेकर और अधिक सवाल उठने लगे हैं.
फिलहाल हादसे में किसी के घायल न होने से बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन इस घटना ने सरकारी भवनों की निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर गंभीर बहस छेड़ दी है.