अयोध्या में संत समाज के भीतर वैचारिक और सियासी तनाव बढ़ गया है. तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में प्रवेश न देने की चेतावनी दी है. उन्होंने योगी पर की गई टिप्पणियों को अपमानजनक बताया और माफी की मांग की. साथ ही उनके गो-आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बताया.
पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मामले में कही ये बात
रामनगरी अयोध्या में संत समाज के भीतर सियासी और वैचारिक हलचल तेज हो गई है. जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के बाद अब तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में प्रवेश न करने देने का स्पष्ट अल्टीमेटम जारी किया है.
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जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की जा रही अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां अत्यंत निंदनीय हैं. मुख्यमंत्री को औरंगजेब और हुमायूं का बेटा बताना न केवल अशोभनीय है, बल्कि सनातन परंपरा और संत मर्यादा के भी खिलाफ है. उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस लेकर मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से क्षमा नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.
सनातनियों से अविमुक्तेश्वरानंद के बहिष्कार की अपील
पीठाधीश्वर ने यह भी आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गाय को लेकर चल रहा आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और इसका उद्देश्य विपक्ष को लाभ पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग के बावजूद, बछड़ा और बैल के वध पर पूर्ण प्रतिबंध की दिशा में ठोस पहल जरूरी है. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों से गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने व गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील की गई.
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ग्राम स्तर पर गोरक्षा की व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. साथ ही उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर भगवा पहनकर संत परंपरा को अपमानित करने का आरोप लगाते हुए सभी सनातनियों से उनके बहिष्कार की अपील की. फिलहाल रामनगरी अयोध्या में इस अल्टीमेटम के बाद संत समाज और सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.