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अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, इस्तीफे के बाद शंकराचार्य ने बड़ा पद देने का किया था ऐलान

बरेली से निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने पहुंचे. कुछ दिन पहले शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी कानून के विरोध में उन्होंने इस्तीफा दिया था. शनिवार को कानपुर पहुंचकर अग्निहोत्री ने माता से आशीर्वाद लिया और मोहल्ले में उनका स्वागत हुआ. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पूरे देश में आंदोलन करने की बात कही. उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा.

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अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात करने पहुंचे हैं. Photo ITG
अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात करने पहुंचे हैं. Photo ITG

बरेली से निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात करने पहुंचे हैं. कुछ दिन पहले शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी को लेकर उन्होंने इस्तीफा दिया था जिसके बाद यूपी सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. शंकराचार्य ने अग्निहोत्री से फोन पर बात कर धर्म क्षेत्र में उनकी नौकरी के मुताबिक बड़ा पद देने की बात कही थी.

कल कानपुर पहुंचे थे अलंकार अग्निहोत्री
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने यूजीसी कानून के विरोध में बरेली से अपने पद से इस्तीफा दिया था, आज अपने पैतृक नगर कानपुर पहुंचे. घर लौटने पर सबसे पहले उन्होंने अपनी माता से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें माला पहनाकर आशीर्वाद दिया. इसके बाद मोहल्ले के लोगों ने बड़ी संख्या में उनका स्वागत किया, मिठाई बांटी और उन्हें मंदिर ले जाकर सम्मानित किया. इस दौरान बुजुर्ग और महिलाएं भी मौजूद रहीं.

पूरे देश में आंदोलन का ऐलान 
कानपुर पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में अग्निहोत्री ने बताया कि उनका आंदोलन अब पूरे देश में फैलाया जाएगा और इसे आगे चलकर एससी-एसटी एक्ट को रद्द कराने के दबाव के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा. उनका कहना है कि प्रदेश भर से लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं.

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प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मांगा इस्तीफा
अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला किया. उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर आरोप लगाया कि यूजीसी कानून 2027 के चुनाव को प्रभावित करने और उत्तर प्रदेश की स्थिरता को भंग करने के लिए बनाया गया है. उनके अनुसार यह कानून ओबीसी, सामान्य और अन्य जातियों को आपस में लड़ाने की साजिश का हिस्सा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर चुनाव अभी होते हैं तो केंद्र के शीर्ष नेता सीटें जीतने में असफल होंगे और दोनों से इस्तीफे की मांग भी की.

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