उत्तर प्रदेश के आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने सोशल मीडिया पर विभागीय नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ बड़ी और सख्त कार्रवाई की है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वर्दी में रील और निजी पोस्ट साझा करने के मामले में 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है. इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है.
पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), कमिश्नरेट आगरा की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर पहले ही विस्तृत गाइडलाइन जारी की जा चुकी है. इन दिशा-निर्देशों में पुलिसकर्मियों को स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि वे अपनी वर्दी, ड्यूटी और विभागीय पहचान का उपयोग निजी सोशल मीडिया कंटेंट बनाने या प्रचार के लिए नहीं कर सकते. इसके बावजूद कई पुलिसकर्मी लगातार इन नियमों की अनदेखी करते हुए अपने निजी अकाउंट पर वीडियो, रील और पोस्ट साझा कर रहे थे.
आदेश में कहा गया है कि पुलिसकर्मियों का यह आचरण उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता की श्रेणी में आता है. विभागीय अनुशासन को सर्वोपरि मानते हुए यह कार्रवाई की गई है ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे कृत्य पुलिस बल की छवि को भी प्रभावित करते हैं और जनता के बीच गलत संदेश जाता है.
इन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई
कार्रवाई के तहत जिन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है, उनमें उप निरीक्षक अरविंद सिंह राठौर (थाना बाह), महिला उप निरीक्षक स्वाति चौधरी (थाना बाह), उप निरीक्षक दीपक चौधरी (थाना पिनाहट), उप निरीक्षक रोहित सोनकर (थाना एतमाद्दौला), उप निरीक्षक प्रदीप कुमार (थाना एतमाद्दौला), उप निरीक्षक हिमांशु पांडे (थाना न्यू आगरा), महिला उप निरीक्षक रानू भाटी (थाना खेरागढ़) और मुख्य आरक्षी सत्यम यादव (थाना फतेहाबाद) शामिल हैं. सभी को तत्काल प्रभाव से रिजर्व पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है.
पुलिस विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और सभी मामलों की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाए. इसके साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले अन्य कर्मियों के खिलाफ भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी.
इस कदम को पुलिस विभाग की अनुशासन व्यवस्था को मजबूत करने और सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विभागीय स्तर पर यह संदेश स्पष्ट किया गया है कि वर्दी की मर्यादा और नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा.