आपने अलग-अलग तरह की प्रतियोगिताओं के बारे में तो खूब सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी केंचुआ पकड़ने की प्रतियोगिता के बारे में सुना है? इंग्लैंड में हर साल एक ऐसा अनोखा कॉम्पिटिशन आयोजित किया जाता है, जिसमें लोग जमीन से केंचुए निकालकर उन्हें पकड़ते हैं. इस प्रतियोगिता में जो व्यक्ति तय समय में सबसे ज्यादा केंचुए पकड़ता है, उसे विजेता माना जाता है. इस प्रतियोगिता का नाम वर्ल्ड वर्म चैंपियनशिप है. इसकी शुरुआत साल 1980 में इंग्लैंड के विलमस्टन में हुई थी. तब से यह प्रतियोगिता लोगों के बीच काफी लोकप्रिय बनी हुई है.
कैसे होता है केंचुआ पकड़ने का कॉम्पिटिशन?
इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को एक निश्चित जगह पर केंचुआ पकड़ने के लिए भेजा जाता है. उनके पास केंचुए खोजने के लिए सिर्फ 30 मिनट का समय होता है. इस दौरान उन्हें जमीन से ज्यादा से ज्यादा केंचुए बाहर निकालने होते हैं. इसके लिए प्रतिभागी अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. कोई लकड़ी के डंडे का इस्तेमाल करता है तो कोई दूसरे साधनों की मदद से जमीन में हलचल पैदा करता है. जमीन हिलने या कंपन होने पर केंचुए ऊपर की तरफ आने लगते हैं और उन्हें पकड़ना आसान हो जाता है, प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले लोग काफी उत्साह के साथ केंचुए खोजते नजर आते हैं. कई लोग इसके लिए अलग तरह के कपड़े और उपकरण भी लेकर आते हैं.
केंचुआ पकड़ने के लिए अपनाते हैं अनोखे तरीके
केंचुआ पकड़ना सुनने में भले ही आसान लगे, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों को काफी मेहनत करनी पड़ती है. उन्हें जमीन पर लगातार नजर रखनी होती है और जैसे ही केंचुआ दिखाई देता है, उसे तुरंत पकड़ना होता है. इस दौरान कुछ लोग मार्जिंग गैजेट, लकड़ी के डंडे और हाथों की मदद लेते हैं. प्रतियोगिता में लोगों का मकसद ज्यादा से ज्यादा केंचुआ पकड़ना होता है, इसलिए हर कोई अपने तरीके से तेजी से काम करता है.
10 साल की बच्ची ने पकड़े थे 567 केंचुए
इस प्रतियोगिता से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प रिकॉर्ड भी है. साल 2009 में ब्रिटेन की सैफी सिम्स ने महज 10 साल की उम्र में 30 मिनट के अंदर 567 केंचुए पकड़कर रिकॉर्ड बनाया था. बताया जाता है कि उन्होंने जमीन में कंपन पैदा करने के लिए मार्जिंग मार्क के डंडे का इस्तेमाल किया था. इसके बाद जमीन से केंचुए बाहर आने लगे और उन्होंने उन्हें पकड़ना शुरू कर दिया.
केंचुओं को नहीं पहुंचाया जाता नुकसान
इस प्रतियोगिता की एक खास बात यह है कि इसमें केंचुओं को नुकसान पहुंचाना मकसद नहीं होता. प्रतियोगिता खत्म होने के बाद पकड़े गए केंचुओं को वापस जमीन में छोड़ दिया जाता है. यानी यह प्रतियोगिता लोगों के लिए मनोरंजन और मुकाबले का जरिया है, लेकिन इसमें केंचुओं को सुरक्षित रखने का भी ध्यान रखा जाता है. यही वजह है कि यह अनोखी प्रतियोगिता आज भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.