जब भी जेल की बात होती है तो दिमाग में एक अंधेरे वाली कोठरी की इमेज बनती है और सलाखों वाला गेट लगा होता है. लेकिन, सोशल मीडिया पर इन दिनों एक जेल वायरल हो रहा है, जिसमें ना सलाखें हैं और ना कोई बंदिश. कमरे में सोफे, टीवी लगे हैं, दिखने में वो घर जैसे हैं. इतना ही नहीं, कैदी के साथ में परिवार वाले भी रह सकते हैं. ये जेल विदेश में नहीं बल्कि भारत में ही है. तो जानते हैं आखिर ये जेल कौनसे हैं और इन जेल में क्या सुविधाएं दी जाती हैं...
सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनमें उन जेलों को दिखाया जा रहा है. कुछ यूट्यूबर्स उन जेलों का टूर करवा रहे हैं. इसमें देखने को मिलता है कि कैदी आराम से घूम रहे हैं, उनके परिवार वाले भी साथ दिख रहे हैं. साथ ही जेल के कमरे भी घर जैसे हैं, जिनमें टीवी लगा है, सोफे लगे हैं, बेड लगे हैं और घर की तरह कई तरह के सामान हैं. जिन्हें देखकर ये अंदाजा लगाया नहीं लगाया जा सकता है कि ये जेल है.
बता दें कि जिन जेल के वीडियो सामने आ रहे हैं, वो जेल राजस्थान के हैं. दरअसल, राजस्थान में कुछ कैदियों के लिए ओपन एयर कैंप के कॉम्सेप्ट पर जेल बनाए गए हैं. सरकारी वेबसाइट के अनुसार, इसमें कुछ कैदियों को एयर कैंप में भेजा जाता है, जिससे वो सोशल मेलजोल के साथ आत्मनिर्भर बन सके. राजस्थान में कैदियों को राजस्थान प्रिज़नर्स ओपन एयर कैंप रूल्स, 1972 के नियमों के अनुसार इन कैंप में भेजा जाता है.
महिला कैदियों को भी इन ओपन एयर कैंप में अपने परिवार के साथ रहने की इजाजत है. ओपन कैंप में कैदी के लिए अपने परिवार के साथ रहना जरूरी है, क्योंकि परिवार के साथ रहना अपने आप में एक बड़ी मर्यादा है. माना जाता है कि परिवार के होने से कई फालतू ध्यान भटकने वाली चीजों से बचा जा सकता है, जिनमें कोई और शामिल हो सकता है. कैदियों को हर सुबह और शाम तय समय पर रोल कॉल में शामिल होना होता है.
किन लोगों को शिफ्ट किया जाता है?
जो दोषी अपनी सज़ा का एक तिहाई हिस्सा काट चुके हैं, जिसमें अच्छे व्यवहार और कम उम्मीदों के आधार पर छूट भी शामिल है, उन्हें बिना दीवार वाली जेलों में शिफ्ट किया जा सकता है.
इसके अलावा कैदियों को काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है और काम करवाए जाते हैं. जो गांव के बैकग्राउंड से होते हैं, उन्हें खेती से जुड़े काम दिए जाते हैं. इसके अलावा कुछ कैदियों को मैन्युफैक्चरिंग या इंडस्ट्रियल, कंस्ट्रक्शन का काम दिया जाता है. इन कैदियों को सही नौकरी दी जाती है ताकि वे परिवार की ज़िम्मेदारियां अच्छे से उठा सकें. कैदी और उसके परिवार की कमाई उसे ही रखने दी जाती है और राज्य उसके गुज़ारे के लिए किसी भी तरह से कोई मदद या सब्सिडी नहीं देता है.