धरती पर अभी भी ऐसे समुदाय और जनजातियां हैं जो अपनी पाषाणकालीन परंपराओं के साथ जी रही है. इनमें से कुछ आधुनिक दुनिया के सामने और दूसरे कल्चर से मोल- जोल बढ़ाने से कतराती है. ऐसा ही एक समुदाय इंडोनेशिया के पापुआ के घने जंगलों में रहता है, जो जमीन पर घर नहीं बनाते. पूरी जिंदगी पेड़ पर बिता देते हैं.
पापुआ के इस समुदाय का नाम कोरोवाई जनजाति है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस आदिवासी समाज में अभी भी कुछ- कुछ नरभक्षी परंपराएं हैं. इनकी सबसे अनोखी खासियत यही है कि ये जमीन पर घर बनाकर नहीं रहते हैं. 15 से 20 मीटर ऊंचे पेड़ों पर ये फूस के घर बनाते हैं और पूरा परिवार वहीं रहता है.
ऐसा ये हजारों सालों से करते आ रहे हैं. कोरोवाई जनजाति को अक्सर वृक्षवासी या पेड़ों पर रहने वाले लोग कहा जाता है. ये पापुआ की स्वदेशी जनजातियों में से एक हैं. इनकी एक अनूठी जीवनशैली है. इसने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है. ये लोग आधुनिक इंसानों की पहुंच से दूर रहते हैं और पेड़ों पर सुंदर घर बनाते हैं.
कोरोवाई जनजाति आज भी बाकी दुनिया से दूर घने जंगलों में उसी तरह रहते हैं. जैसे कभी इंसान पाषाण काल में रहते थे. ये आज भी शिकार पर निर्भर हैं. जानवरों का शिकार, फंल कंद और जंगलों सें मिलने वाले दूसरे प्राकृतिक संसाधनों पर इनका जीवन टिका हुआ है.
कोरोवाई लोगों के बीच आज भी हजारों साल पुरानी परंपराएं और आदिम रिवाज जिंदा है. यही वजह है कि ये लोग पेड़ों पर घर बनाकर रहते हैं. पेड़ों पर रहने के उनके कारण अलग- अलग हैं. इनमें सांप और अन्य जंगली जानवरों के हमलों से बचाव से लेकर यह मान्यता शामिल है कि बुरी आत्माएं जमीन पर निवास करती हैं.यह समुदाय बुरी आत्माओं को लेकर काफी सजग रहता है. यही वजह है कि इनके बीच आज भी कुछ मामलों में नरभक्षण के लक्षण देखे गए हैं.
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कोरोवाई जनजाति के लोग के पेड़ों पर बने घर जंगल में आसानी से मिलने वाली प्राकृतिक सामग्रियों, जैसे लकड़ी, बेंत और साबूदाना के पत्तों का इस्तेमाल करके बनाते हैं. पेड़ों पर मजबूत और टिकाऊ संरचनाएं बनाने में वे असाधारण रूप से कुशल होते हैं.
खतरे और बुरी आत्माओं से बचने के अलावा, पेड़ों पर घर बनाने से उन्हें फल और छोटे जानवरों जैसे भोजन को ढूंढना भी आसान हो जाता है. वे अपनी दैनिक जरूरतों की पूर्ति के लिए जंगल पर निर्भर रहते हैं. शिकार और भोजन इकट्ठा करने का काम पुरुष करते हैं, जबकि महिलाएं घरेलू काम और बच्चों की देखभाल के लिए जिम्मेदार होती हैं.