जयपुर की तीज सवारी में इस बार रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों और लोक कलाकारों के बीच एक नन्ही कलाकार ने खास ध्यान खींचा. महज 9 साल की सिनाया बियानी ने अपनी कला और संतुलन से ऐसी प्रस्तुति दी कि वहां मौजूद लोग उन्हें देखते रह गए. सिनाया को प्यार से 'जयपुर हूּपर' भी कहा जाता है.
राजस्थानी वेशभूषा में सजी सिनाया ने हूला-हूप के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया. उनकी प्रस्तुति में राजस्थान की पारंपरिक छवि और आधुनिक प्रदर्शन कला का खूबसूरत मेल नजर आया.हूला-हूप एक गोल छल्ला होता है, जिसे कमर, हाथ या शरीर के दूसरे हिस्सों के आसपास घुमाया जाता है. इसमें शरीर का संतुलन और तालमेल बनाए रखना पड़ता है. तीज सवारी के रंगीन माहौल के बीच उनका अंदाज लोगों को खासा पसंद आया.
छोटी उम्र, बड़ा हुनर
सिनाया ने बेहद कम उम्र में हूला-हूप की कला में अपनी अलग पहचान बनाई है. वह अलग-अलग मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं और हूला-हूप के जरिए लगातार नए करतब दिखाती रही हैं.
जयपुर की तीज सवारी में भी उन्होंने इसी हुनर को राजस्थानी अंदाज के साथ पेश किया. पारंपरिक पोशाक में हूला-हूप के साथ उनका संतुलन और प्रदर्शन देखने लायक था.
जयपुर की तीज सवारी वैसे भी राजस्थान की लोक संस्कृति और शाही परंपरा की झलक के लिए जानी जाती है. इस दौरान सजी हुई सवारी, लोक कलाकार, संगीत और पारंपरिक परिधान पूरे माहौल को खास बना देते हैं. 2026 में जयपुर तीज उत्सव 14-15 अगस्त को आयोजित होने की जानकारी पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दी गई है.
सोशल मीडिया पर छाया वीडियो
तीज सवारी के दौरान सिनाया की प्रस्तुति के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं. लोग उनकी उम्र और इतनी कम उम्र में दिखाए गए संतुलन और हुनर को देखकर हैरान हैं.
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सिनाया की प्रस्तुति यह भी दिखाती है कि नई पीढ़ी के बच्चे पारंपरिक संस्कृति को अपने हुनर और आधुनिक कला के साथ किस तरह नए अंदाज में लोगों के सामने पेश कर सकते हैं. जयपुर की तीज सवारी में उनकी मौजूदगी ने इस बार इसी वजह से खास आकर्षण पैदा किया.
देखें वीडियो
7 साल की उम्र में बनाया था रिकॉर्ड
सिनाया की पहचान सिर्फ तीज सवारी की इस प्रस्तुति तक सीमित नहीं है. सिनाया की उपलब्धियों की बात करें तो जून 2025 में उनके नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है, जब वो महज 7 साल की थीं. उन्होंने 30 सेकंड में हाथ पर हूला-हूप के 101 रोटेशन पूरे किए और इस श्रेणी में 94 रोटेशन के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा. इस उपलब्धि के बाद सिनाया को ‘दुनिया की सबसे तेज अंडर-16 हूला-हूपर’ के रूप में पहचान मिली.
इस उपलब्धि के बाद उन्हें 16 साल से कम उम्र की श्रेणी में सबसे तेज हूला-हूपर के तौर पर पहचान मिली. रिकॉर्ड के लिए उन्होंने तीन महीने से ज्यादा समय तक लगातार अभ्यास किया था.
'जयपुर हूּपर' के नाम से बनी पहचान
सिनाया को उनकी इसी प्रतिभा के चलते 'जयपुर हूּपर' के नाम से जाना जाता है. इतनी कम उम्र में हूला-हूप में उनकी पकड़ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है.उनकी कहानी की खास बात यह है कि वह पारंपरिक भारतीय परिधान और राजस्थान की संस्कृति को अपनी आधुनिक कला के साथ जोड़कर प्रस्तुत करती हैं. जयपुर की तीज सवारी में उनकी प्रस्तुति इसी खूबसूरत मेल की एक झलक रही.