धरती पर शराब पीने के शौकीन लोगों को यह जानकर हैरानी हो सकती है कि अंतरिक्ष में भी 'शराब' मौजूद है. हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र के पास एक ऐसा विशाल गैस और धूल का बादल मिला है, जिसमें अल्कोहल के कई तरह के मॉलिक्यूल मौजूद हैं. वैज्ञानिकों को यहां प्रोपेनॉल नाम का अल्कोहल भी मिला है, जिसे अब तक अंतरिक्ष में खोजा गया सबसे बड़ा अल्कोहल अणु बताया जा रहा है.
हालांकि, यह पीने वाली शराब नहीं है, बल्कि एक तरह का रासायनिक पदार्थ है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी खोज से अंतरिक्ष में जीवन के लिए जरूरी जटिल कार्बनिक पदार्थों के बनने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है.
आकाशगंगा के केंद्र में मिला शराब का खजाना
वैज्ञानिकों की नजर मिल्की वे के केंद्र के पास मौजूद सैजिटेरियस बी2 नाम के विशाल आणविक बादल पर है. यह पृथ्वी से करीब 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. यह इलाका गैस और धूल से भरा हुआ है और यहां बड़ी संख्या में नए तारों का निर्माण होता है. इसी वजह से इसे तारों की जन्मस्थली भी कहा जाता है.
इस बादल में वैज्ञानिकों को अल्कोहल के कई तरह के अणु मिले हैं. इनमें मेथेनॉल और इथेनॉल के अलावा विनाइल अल्कोहल, एथिल फॉर्मेट और प्रोपेनॉल जैसे रसायन शामिल हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, सैजिटेरियस बी2 में मेथेनॉल और इथेनॉल की मात्रा इतनी ज्यादा है कि वहां करीब 10 अरब अरब अरब लीटर इन दोनों पदार्थों के मौजूद होने का अनुमान लगाया गया है. इसका मतलब यह नहीं है कि वहां शराब किसी समुद्र या तालाब की तरह तरल रूप में जमा है. ये अणु अंतरिक्ष में मौजूद गैस और धूल के बीच फैले हुए हैं.
क्या है अंतरिक्ष में मिला यह अल्कोहल?
अंतरिक्ष में मिले प्रोपेनॉल की खास बात यह है कि यह अब तक खोजा गया सबसे बड़ा अल्कोहल अणु है. इसका इस्तेमाल धरती पर कई कामों में होता है. इसका एक रूप आइसोप्रोपेनॉल है, जिसका इस्तेमाल हैंड सैनिटाइजर में किया जाता है. इसका दूसरा रूप नॉर्मल प्रोपेनॉल कहलाता है.
वैज्ञानिकों ने चिली में स्थित रेडियो टेलीस्कोप की मदद से सैजिटेरियस बी2 में आइसोप्रोपेनॉल की मौजूदगी का पता लगाया. इस खोज से जुड़ी दो स्टडीज वैज्ञानिक जर्नल एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशित हुई हैं.
इस रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रोपेनॉल के दोनों रूपों की खोज बेहद अहम है. क्योंकि इनकी रासायनिक बनावट काफी मिलती-जुलती है और ये लगभग एक जैसी परिस्थितियों में मौजूद हो सकते हैं. इनकी मात्रा की तुलना करके वैज्ञानिक यह समझ सकते हैं कि अंतरिक्ष में ऐसे जटिल रसायन आखिर बनते कैसे हैं.
अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं ऐसे रसायन?
वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतरिक्ष में इतने जटिल कार्बनिक अणु बनते कैसे हैं? अब तक अंतरिक्ष में करीब 125 तरह के अणुओं की पहचान की जा चुकी है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इनमें से ज्यादातर अणु छोटे-छोटे अणुओं या परमाणुओं के आपस में टकराने और जुड़ने से बनते हैं. लेकिन विनाइल अल्कोहल और प्रोपेनॉल जैसे जटिल रसायनों की मौजूदगी को सिर्फ इस प्रक्रिया से पूरी तरह समझाना आसान नहीं है.
साल 2001 में वैज्ञानिकों ने 12 मीटर के रेडियो टेलीस्कोप की मदद से सैजिटेरियस बी2 में विनाइल अल्कोहल के संकेत पकड़े थे. यह C2H4O समूह के तीन स्थिर अणुओं में से आखिरी था, जिसकी अंतरिक्ष में मौजूदगी का पता चला था.
उस समय अमेरिकी नेशनल रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक बैरी टर्नर ने कहा था कि विनाइल अल्कोहल की खोज अंतरिक्ष में जटिल कार्बनिक पदार्थों के बनने की प्रक्रिया को समझने के लिए एक अहम सुराग है.
अंतरिक्ष में रास्पबेरी का स्वाद और रम जैसी खुशबू!
सैजिटेरियस बी2 बादल की एक और खोज काफी दिलचस्प है. वैज्ञानिकों को यहां एथिल फॉर्मेट नाम का रसायन भी मिला है. यह वही पदार्थ है, जो रास्पबेरी यानी एक तरह के फल को उसका खास स्वाद देने में भूमिका निभाता है. इसकी एक खास बात यह भी है कि इसमें रम जैसी खुशबू होती है.
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इसी वजह से कभी वैज्ञानिकों ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि हमारी आकाशगंगा का केंद्र रास्पबेरी जैसा स्वाद और रम जैसी खुशबू दे सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अंतरिक्ष में सचमुच रास्पबेरी या रम मौजूद है. ये सभी रासायनिक अणुओं के गुण हैं.
क्या इन खोजों से दूसरे ग्रहों पर जीवन का पता चलेगा?
वैज्ञानिकों के लिए इन खोजों का महत्व सिर्फ इतना नहीं है कि अंतरिक्ष में शराब से जुड़े रसायन मिल रहे हैं. असल में, ये रसायन उन्हें यह समझने में मदद कर सकते हैं कि जीवन के लिए जरूरी जटिल कार्बनिक अणु अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं और अलग-अलग जगहों तक कैसे पहुंचते हैं.
यही वजह है कि सैजिटेरियस बी2 जैसे विशाल आणविक बादलों पर लगातार नजर रखी जा रही है. वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि इनकी मदद से यह समझने का रास्ता खुलेगा कि पृथ्वी के अलावा ब्रह्मांड में कहीं और जीवन के लिए जरूरी रासायनिक परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं या नहीं.