जर्मनी में एक शख्स हाथ से जूते बनाता है और एक जोड़े की कीमत होती है 2000 यूरो यानी करीबन 2 लाख रुपये. उसे पहली बार किसी के लिए एक जोड़ा नया जूता बनाने में 11 से 12 हफ्ते लग जाते हैं. नाइजीरिया से जर्मनी आकर उसने अच्छे से दफ्तर में कोई अच्छा सा डेस्क जॉब करने के बदले कस्टम जूता बनाने का काम चुना. वह चाहता तो आराम से एसी वाले कमरे में बैठकर 5 से 9 वाली कोई नौकरी कर सकता था. फिर, उसने शूमेकर बनने का ही काम क्यों चुना, इसके पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है.
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में रहने वाले 31 साल के रिचर्ड आफ्रे ने डीडब्लू को एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि मैं जानता था कि दफ्तर में बैठना या लैपटॉप पर काम करना मुझसे नहीं हो पाएगा. मेरे पास एक ही विकल्प था अपने हाथों से काम करना. क्योंकि मैंने हमेशा अपने हाथों से अच्छा काम किया है. लोग शू मेकर के बारे में सोचते हैं तो उन्हें कोई बूढ़ा या झुका हुआ इंसान नजर आता है. मैं इस धारणा से अलग जाना चाहता था. यह कहना है का.
रिचर्ड जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में रहते हैं और वह एक शू मेकर मास्टर हैं. उन्होंने बताया भले ही मैं जूते बनाता हूं लेकिन मुझे हर चीज मरम्मत करना आना चाहिए. मैं सिर्फ कस्टम मेड जूतों से अपना खर्च नहीं चला सकता. क्योंकि मेरे ग्राहक वोलोग हैं, जो जिंदगी बड़ी निष्ठा से जीते हैं.
रिपेयर होने लायक बनाता हूं जूते...
रिचर्ड के मुताबिक, उनके कस्टमर ऐसे होते हैं जो कोई चीज को खरीदकर तुरंत नहीं फेंक देते. उन्होंने बताया कि मेरे कस्टमर ऐसे लोग हैं जो क्वालिटी पर थोड़ा ज्यादा खर्च करते हैं और ऐसे जूते खरीदते हैं जिनकी मरम्मत हो सके. ऐसे जूते जो बार- बार रिपेयर किए जा सके.
जूते बनाने में लगने वाले समय पर के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी जूते के मॉडल पर निर्भर करता है कि उसे बनाने में कितना समय लगेगा. आमतौर पर मैं 10 से 12 हफ्ते लेता हूं. कभी-कभी 14 हफ्ते भी लग जाते हैं. एक जोड़ा जूता बनाने के 200 अलग- अलग स्टेज होते हैं और अगर यह पहली बार किसी के लिए पहला जोड़ा बनाया जा रहा है तो उसे बनाने में 250 अलग- अलग स्टेज हो सकते हैं.
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पहला जोड़ा तैयार करने 2000 यूरो यानी करीबन 2 लाख रुपये तक का खर्च आता है. क्योंकि मुझे इसकी नाप लेनी पड़ती है. एक बार जब मैं यह तैयार कर लेता हूं तो मेरे पास फाउंडेशन होता है. उसके बाद हर अतिरिक्त जोड़ा कम खर्चीला होता है. क्योंकि मेरे पास पैटर्न पहले से मौजूद होता है और नाप हम पहले ही ले चुके होते हैं. कई हफ्ते काम करने के बाद जब मैं जूता कस्टमर को देता हूं और जब वो उसे पहनते हैं तो यह बेहद रोमांचक पल होता है.
जीवन भर चल सकते हैं ये जूते
अक्सर मेरे कस्टमर मुझे गले लगे लगा लेते हैं क्योंकि वह मेरे काम से बहुत खुश होते हैं. वो असल में इस बात से बहुत उत्साहित होते हैं कि आखिरकार उन्हें ऐसा जूता मिल ही गया जो ठीक उसी तरह से फिट हो रहा है, जैसा उन्होंने सोचा था.रिचर्ड ने कहा कि अच्छे से ध्यान रखेंगे तो यह जीवन भर चलेंगे.
रिचर्ड ने बताया कि लंबे समय के लिए मेरा लक्ष्य है अपना ब्रांड बनाना. अपनी दुकान बनाना और लंबे दौर के लिए टिके रहना. उसके बाद किसी दिन शायद मैं नाइजीरिया चला जाऊं और फिर वहां स्कूल जैसा कुछ बनाऊं. जूता बनाना सिखाने जैसा एक स्कूल और कारीगरी का भी.
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जर्मनी को अपना घर मानने के बावजूद यहां पूरी जिंदगी रहने की मेरी योजना नहीं है. क्योंकि दुनिया बहुत बड़ी है. मेरी जिंदगी का मतलब हमेसा चलते रहना है और खुद को हमेशा एक ही जगह पर देखना नहीं चाहता. रिचर्ड बताते हैं कि मुझे फ्रैंकफर्ट बहुत अच्छा लगता है. अब मैं जर्मन भी फर्राटे से बोलता हूं. मैं खुद को जर्मन मानता हूं और कह सकता हूं कि जर्मनी मेरा घर है. फिर भी मैं यहां से जाना चाहता हूं.