कर्ज लेने के बाद उसे सालों तक न चुकाने की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी. लेकिन क्या कोई सरकार या सेना करीब 80 साल बाद भी अपना पुराना कर्ज चुका सकती है? चीन में ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां युद्ध के दौरान एक किसान से उधार लिया गया अनाज आखिरकार दशकों बाद उसके परिवार को लौटाया गया.
यह कहानी चीन के पूर्वी इलाके में रहने वाले एक किसान डिंग वानमिन के परिवार की है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1947 में चीन में गृहयुद्ध चल रहा था. उस समय पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक बड़ी टुकड़ी कुओमिन्तांग की सेना के खिलाफ लड़ाई के दौरान दाबी पर्वतीय इलाके में पहुंची थी.
सैनिकों के पास खाने तक का इंतजाम नहीं था
युद्ध की कठिन परिस्थितियों के कारण सैनिकों के पास खाने-पीने का सामान लगभग खत्म हो चुका था. इलाके के गांवों को पहले ही कुओमिन्तांग की सेना लूट चुकी थी. इतना ही नहीं, डिंग वानमिन के बेटे को भी जबरन सेना में भर्ती कर लिया गया था.
इसके बावजूद जब PLA के सैनिक गांव पहुंचे तो उन्होंने अनुशासन का परिचय दिया. सैनिक फटे-पुराने कपड़ों और घास से बनी चप्पलों में थे, लेकिन उन्होंने गांव वालों के घरों में घुसने के बजाय खुले में रहना पसंद किया. सैनिकों का यह व्यवहार देखकर किसान डिंग वानमिन का भरोसा जीत लिया.
परिवार का लगभग पूरा अनाज सेना को दे दिया
डिंग वानमिन ने सेना को अपने घर में रखा करीब 850 किलोग्राम से ज्यादा अनाज उधार दे दिया. यह उनके परिवार का लगभग पूरा खाद्यान्न भंडार था.
बदले में सेना के अधिकारियों ने उन्हें हाथ से लिखा एक रसीदनुमा दस्तावेज दिया, जिसमें तारीख, अनाज की मात्रा और अधिकारियों के हस्ताक्षर दर्ज थे. इसे उस समय 'ग्रेन लोन सर्टिफिकेट' यानी अनाज उधार लेने का प्रमाणपत्र कहा जाता था.
उस दौर में जब रेड आर्मी या बाद में कम्युनिस्ट सेना को भोजन की कमी होती थी, तो वह गांव वालों से अनाज उधार लेकर भविष्य में लौटाने का लिखित वादा करती थी.
80 साल तक ईंटों के बीच छिपा रहा कागज
समय बीतता गया और यह प्रमाणपत्र परिवार के पुराने घर की दीवारों के बीच दबा रह गया. 1990 के दशक में जब परिवार अपना पुराना घर तोड़ रहा था, तब ईंटों के बीच एक पीला पड़ा कागज मिला. जांच करने पर पता चला कि यही वह ऐतिहासिक ग्रेन लोन सर्टिफिकेट था.
डिंग वानमिन के पोते डिंग गुआंगयी ने बाद में पहचान लिया कि यह वही दस्तावेज है, जो उनके दादा को सेना ने अनाज लेने के बदले दिया था.
परिवार ने कभी नहीं मांगे पैसे
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि डिंग वानमिन और बाद में उनके बेटे ने कभी इस उधार की रकम वापस नहीं मांगी. आर्थिक तंगी के समय भी उन्होंने इस दस्तावेज का इस्तेमाल नहीं किया. परिवार के लिए यह सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि इतिहास का हिस्सा बन चुका था.
सरकार ने खुद चुकाया पुराना कर्ज
पिछले साल 2025 में डिंग गुआंगयी को पता चला कि स्थानीय प्रशासन पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज इकट्ठा कर रहा है. उन्होंने यह प्रमाणपत्र सरकार को सौंपने का फैसला किया.
यह भी पढ़ें: बिच्छू को पीसकर ऐसे नशा कर रहे हैं पाकिस्तानी? फिर कई घंटे ट्रिप में रहते हैं
जब अधिकारियों को पता चला कि युद्धकाल का यह कर्ज आज तक नहीं चुकाया गया है, तो उन्होंने ऐतिहासिक अनाज की कीमत, महंगाई और इस दस्तावेज के महत्व को ध्यान में रखते हुए परिवार को 70,000 युआन (करीब 10,300 अमेरिकी डॉलर) की राशि दी. इतना ही नहीं, डिंग गुआंगयी ने इस रकम में से 20,000 युआन पूर्व सैनिकों की मदद करने वाली एक संस्था को दान भी कर दिए.
'दादा को भरोसा था कि देश बदलेगा'
डिंग गुआंगयी ने कहा कि उनके दादा ने अनाज इसलिए उधार दिया था क्योंकि उन्हें भरोसा था कि कम्युनिस्ट पार्टी आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाएगी. उन्होंने कहा कि इस प्रमाणपत्र को घर में संभालकर रखने से ज्यादा जरूरी है कि लोग इस इतिहास को जानें और याद रखें.अब यह ऐतिहासिक ग्रेन लोन सर्टिफिकेट स्थानीय शहीद स्मारक संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है.इस कहानी ने चीन के सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है.