टीवी पर भीष्म पितामह और शक्तिमान जैसे आइकॉनिक रोल निभाने वाले मुकेश खन्ना इस समय एक ताजा कॉन्ट्रोवर्सी में फंस गए हैं. उन्होंने भारत के राष्ट्रगान पर सवाल उठाए हैं. वो चाहते हैं कि जन गण मन की जगह वंदे मातरम इस देश का राष्ट्रगान बने. उनके मुताबिक, जन गण मन अंग्रेजों की क्वीन एलिजाबेथ के गुणगान गाने वाला गीत है, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था.
राष्ट्रगान पर छिड़ी बहस
मुकेश खन्ना अपने बयान को लेकर बुरे फंसे थे. लोगों ने उन्हें ट्रोल किया और उनके तथ्यों पर सवाल उठाने लगे. मगर एक्टर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है. वो अभी भी अपनी बात पर टिके हुए हैं, और चाहते हैं कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगान बने. न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान शक्तिमान एक्टर ने कहा- वंदे मातरम को बेवजह विवाद का मुद्दा बना दिया गया है.
'जन गण मन को लेकर मेरी कही बातें वायरल हो गई हैं. लेकिन मैं फिर से साफ करना चाहता हूं कि ये मेरे भारत देश का राष्ट्रगान नहीं हो सकता. इसे अंग्रेजों के शासन के दौरान लिखा गया था, उस समय जॉर्ज 5 का शासन था और भारत अंग्रेजों के अधीन था. जन गण मन अधिनायक शब्दों का मतलब शासक से है और इसमें उसे भारत की किस्मत तय करने वाला बताया गया है.'
मुकेश ने आगे कहा- अगर इन पंक्तियों का शाब्दिक अर्थ देखा जाए, तो ये सवाल उठता है कि ये गीत आखिर किसे संबोधित कर रहा है. मेरा मानना है कि ‘वंदे मातरम’ को अधिक राष्ट्रीय महत्व दिया जाना चाहिए, क्योंकि ये हमारी मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना व्यक्त करता है. हमने कई सालों तक अंग्रेजों का शासन झेला. लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी हम अंग्रेजी शिक्षा को ज्यादा महत्व देते हैं. जबकि भारत की अपनी समृद्ध और पुरानी शिक्षा परंपरा रही है.
वैसे आपको बता दें कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंगाल के बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के आसपास लिखा था. ये एक कविता के रूप में लिखा गया गीत था, जिसे बाद में 1950 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया. वहीं जन गण मन आज से करीब 115 साल पहले यानी 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर ने लिख डाला था, जिसपर अब मुकेश खन्ना सवाल उठा रहे हैं. देखना है कि आखिर उनके बयान से क्या होता है.