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स्कूल खुलने से पहले ही पढ़ा दिया पूरा सिलेबस! चीन में ‘प्री-मेड चिल्ड्रन’ वायरल, जानें क्या है ये नया ट्रेंड

चीन में बच्चों की गर्मी की छुट्टियों के दौरान उन्हें अगली कक्षा का पाठ पहले से पढ़ाने का चलन चर्चा में है. इसी को सोशल मीडिया पर ‘प्री-मेड चिल्ड्रन’ कहा जा रहा है. कई माता-पिता को डर है कि अगर उनका बच्चा छुट्टियों में आगे की पढ़ाई नहीं करेगा तो वह दूसरे बच्चों से पीछे रह जाएगा.

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‘प्री-मेड’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर पहले से तैयार चीजों के लिए किया जाता है. ( Photo: ITG)
‘प्री-मेड’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर पहले से तैयार चीजों के लिए किया जाता है. ( Photo: ITG)

गर्मी की छुट्टियां आमतौर पर बच्चों के लिए खेलने, घूमने, दोस्तों के साथ समय बिताने और आराम करने का मौका होती हैं. लेकिन चीन में कुछ बच्चों के लिए छुट्टियों का मतलब अब पहले से ही अगली क्लास की तैयारी करना हो गया है. वहां माता-पिता बच्चों को स्कूल का नया सेशन शुरू होने से पहले ही कई सब्जेक्ट की पढ़ाई करवाने में जुटे हैं. इसी ट्रेंड को लेकर चीन में ‘प्री-मेड चिल्ड्रन’ यानी ‘पहले से तैयार बच्चे’ शब्द चर्चा में है. यह शब्द इसलिए इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि कुछ माता-पिता बच्चों को छुट्टियों में ही आगे का पाठ पढ़ा देना चाहते हैं. उनका मानना है कि इससे बच्चा स्कूल में पढ़ाए जाने वाले पाठ को पहले से समझ लेगा और दूसरे बच्चों की तुलना में आगे रह सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के झेजियांग प्रांत की एक मां अपने बेटे को गर्मी की छुट्टियों में ही अगली क्लास के लिए तैयार कर रही हैं. उनका बेटा चौथी कक्षा में पढ़ता है. छुट्टियों के दौरान उसे चीनी कविताएं याद करने, इंग्लिश के शब्द सीखने और मैथ्स की ऑनलाइन कक्षाएं करने के लिए कहा गया. खास बात यह है कि इनमें से कई चीजें बच्चे को अगले शैक्षणिक सत्र में स्कूल में पढ़ाई जानी थीं. यानी स्कूल खुलने से पहले ही बच्चा उस पाठ को पढ़ रहा था, जिसे उसके सहपाठी बाद में पढ़ने वाले थे. मां के मुताबिक, वह और उनके पति नौकरी से लौटने के बाद भी बच्चे की पढ़ाई में समय देते हैं. इससे माता-पिता और बच्चे तीनों के लिए छुट्टियों का समय काफी व्यस्त हो जाता है. फिर भी माता-पिता को डर रहता है कि अगर उन्होंने बच्चे को पहले से नहीं पढ़ाया तो वह दूसरे बच्चों से पीछे रह सकता है.

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माता-पिता को क्यों लगता है जरूरी?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बच्चों के बीच बढ़ती शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा बताई जा रही है. कई माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करे और पढ़ाई में दूसरों से आगे रहे. इसी सोच के कारण कुछ माता-पिता स्कूल की पढ़ाई शुरू होने से पहले ही बच्चों को पाठ्यक्रम का एक हिस्सा पढ़ा देते हैं. इससे उन्हें लगता है कि जब स्कूल में शिक्षक वही विषय पढ़ाएंगे तो बच्चे को चीजें आसानी से समझ आएंगी. लेकिन इसके साथ एक दूसरी चिंता भी सामने आ रही है. अगर हर परिवार अपने बच्चे को पहले से पढ़ाने लगे तो प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है. इसके बाद माता-पिता को लग सकता है कि उनका बच्चा तभी आगे रह सकता है, जब वह बाकी बच्चों से भी पहले पढ़ाई शुरू करे.

‘प्री-मेड चिल्ड्रन’ नाम क्यों दिया गया?
‘प्री-मेड’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर पहले से तैयार चीजों के लिए किया जाता है. चीन में सोशल मीडिया पर इसी शब्द को बच्चों की पढ़ाई से जोड़कर इस्तेमाल किया जा रहा है. यह नाम उन बच्चों के लिए एक तरह का व्यंग्य है, जिन्हें छुट्टियों में भी लगातार पढ़ाकर अगले सत्र के लिए पहले से तैयार किया जा रहा है. इसमें यह सवाल भी छिपा है कि क्या बच्चों को हर समय उपलब्धि और पढ़ाई की दौड़ में आगे रखने की कोशिश उनके बचपन के सामान्य अनुभवों को कम कर रही है.

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बच्चों की छुट्टियां और पढ़ाई के बीच बैलेंस
छुट्टियों में थोड़ी पढ़ाई करना अपने आप में गलत नहीं है. बच्चों को पिछली पढ़ाई दोहराने या अपनी पसंद की कोई नई चीज सीखने का मौका दिया जा सकता है. लेकिन अगर छुट्टियों का ज्यादातर समय केवल पढ़ाई, कक्षाओं और गृहकार्य में निकल जाए तो बच्चे के लिए आराम और मनोरंजन का समय कम हो सकता है. बचपन में खेलना, परिवार के साथ समय बिताना और अपनी पसंद की एक्टिविटी में हिस्सा लेना भी महत्वपूर्ण होता है. इसलिए बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें आराम और अपनी रुचियों के लिए समय देना जरूरी है.

सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा
‘प्री-मेड चिल्ड्रन’ शब्द ने इसी वजह से लोगों का ध्यान खींचा है. कुछ लोग मानते हैं कि कंपटिशन एडुकेशन सिस्टम में माता-पिता के पास अपने बच्चों को पहले से तैयार करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचता. वहीं कुछ लोगों का सवाल है कि आखिर बच्चों को हर समय आगे निकलने की दौड़ में क्यों रखा जाए. कुल मिलाकर, चीन में ‘प्री-मेड चिल्ड्रन’ का ट्रेंड सिर्फ छुट्टियों में पढ़ाई कराने की कहानी नहीं है. यह बच्चों की शिक्षा, माता-पिता की चिंता और बढ़ते कंपटिशन के बीच बैलेंस का सवाल भी खड़ा करता है. क्या बच्चों को हर छुट्टी में अगली क्लास के लिए तैयार करना जरूरी है या उन्हें कुछ समय बिना पढ़ाई के भी अपने तरीके से जीने देना चाहिए? 

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