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अमेरिका में छत के नीचे एल्युमिनियम क्यों चिपका रहे लोग? होता है बड़ा फायदा

गर्मी के मौसम में घर की छत सबसे ज्यादा गर्म होती है, जिससे कमरों का तापमान बढ़ जाता है. वायरल वीडियो के अनुसार, अगर छत के नीचे एल्युमिनियम फॉयल की रिफ्लेक्टिव लेयर लगाई जाए तो घर के अंदर आने वाली गर्मी 53% तक कम हो सकती है.

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 एल्युमिनियम फॉयल आधारित रेडिएंट बैरियर घर के अंदर आने वाली गर्मी को काफी हद तक कम कर सकता है. ( Photo: ITG)
एल्युमिनियम फॉयल आधारित रेडिएंट बैरियर घर के अंदर आने वाली गर्मी को काफी हद तक कम कर सकता है. ( Photo: ITG)

गर्मी का मौसम आते ही सबसे बड़ी परेशानी होती है घर का गर्म हो जाना. खासकर जिन घरों की छत सीधे धूप के संपर्क में रहती है, वहां दोपहर के समय कमरे किसी भट्टी से कम नहीं लगते. कई लोग इस गर्मी से राहत पाने के लिए एसी, कूलर और पंखों का सहारा लेते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते बिजली के बिल की वजह से हर समय इन्हें चलाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता.

इसी बीच एक नई रिसर्च ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इस रिसर्च में दावा किया गया है कि अगर घर की छत के नीचे एल्युमिनियम फॉयल की एक खास रिफ्लेक्टिव लेयर लगाई जाए तो घर के अंदर आने वाली गर्मी को 53 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इस टेक्नीक की खूब चर्चा हो रही है. लेकिन क्या सच में सिर्फ एल्युमिनियम फॉयल लगाने से घर ठंडा हो सकता है? 

आखिर क्या कहती है रिसर्च?
रिसर्च के अनुसार, घर के अंदर गर्मी आने का सबसे बड़ा कारण छत होती है. दिनभर सूरज की किरणें छत पर पड़ती रहती हैं, जिससे वह बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है. इसके बाद वह गर्मी धीरे-धीरे घर के अंदर पहुंचती है और कमरों का तापमान बढ़ने लगता है. रिसर्च में बताया गया कि अगर छत के नीचे एल्युमिनियम फॉयल की रिफ्लेक्टिव लेयर लगाई जाए तो यह सूरज से आने वाली रेडिएंट हीट यानी विकिरण वाली गर्मी को वापस रिफ्लेक्ट कर देती है. इससे छत कम गर्म होती है और घर के अंदर पहुंचने वाली गर्मी में काफी कमी आ जाती है. शोधकर्ताओं ने पाया कि सही तरीके से लगाए गए रेडिएंट बैरियर की मदद से गर्मी का प्रवेश 53 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.

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एल्युमिनियम फॉयल आखिर काम कैसे करता है?
बहुत से लोगों को लगता है कि एल्युमिनियम फॉयल खुद ठंडक पैदा करता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह कोई कूलिंग मशीन नहीं है और न ही यह एसी की तरह हवा को ठंडा करता है. असल में एल्युमिनियम  फॉयल की चमकदार सतह सूरज से आने वाली गर्मी को काफी हद तक वापस रिफ्लेक्ट कर देती है. सामान्य छत गर्मी को अपने अंदर सोख लेती है, जबकि एल्युमिनियम फॉयल उस गर्मी का बड़ा हिस्सा वापस भेज देता है. इसी वजह से छत का तापमान कम बढ़ता है और कमरों में भी अपेक्षाकृत कम गर्मी महसूस होती है. यही तकनीक रेडिएंट बैरियर के नाम से जानी जाती है और कई देशों में इसका इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है.

किन घरों में सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक हर घर के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं होती. इसका सबसे ज्यादा फायदा उन घरों में हो सकता है-जिनकी छत सीधे धूप के संपर्क में रहती है. जहां गर्मियों में तापमान बहुत अधिक रहता है. जिन घरों की छत कंक्रीट या टिन की बनी होती है. जहां छत के नीचे खाली जगह मौजूद होती है. जिन इलाकों में तेज धूप लंबे समय तक पड़ती है. ऐसी जगहों पर एल्युमिनियम फॉयल आधारित रेडिएंट बैरियर घर के अंदर आने वाली गर्मी को काफी हद तक कम कर सकता है.

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क्या इससे एसी की जरूरत खत्म हो जाएगी?
रिसर्च में कहीं भी यह दावा नहीं किया गया कि एल्युमिनियम फॉयल लगाने के बाद एसी या कूलर की जरूरत खत्म हो जाएगी. इसका मकसद केवल घर के अंदर आने वाली गर्मी को कम करना है. जब कमरा कम गर्म होगा तो एसी और कूलर को भी कम मेहनत करनी पड़ेगी. इससे बिजली की खपत कम हो सकती है और बिजली का बिल भी पहले की तुलना में घट सकता है. यानी यह तकनीक एसी का ऑप्शन नहीं, बल्कि उसकी मदद करने वाली तकनीक है. कई लोग सोच सकते हैं कि रसोई में इस्तेमाल होने वाला साधारण एल्युमिनियम फॉयल खरीदकर छत पर लगा दिया जाए.

सही इंस्टॉलेशन क्यों है जरूरी?
सिर्फ एल्युमिनियम फॉयल खरीदकर कहीं भी लगा देने से रिजल्ट नहीं मिलेगा. यह रिजल्ट इस बात पर निर्भर करता है कि इसे किस तरह लगाया गया है. अगर फॉयल गलत दिशा में लगाई जाए, उसके और छत के बीच पर्याप्त एयर गैप न हो या उसे गलत सामग्री के साथ इस्तेमाल किया जाए, तो उसका असर काफी कम हो सकता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर कोई व्यक्ति इस तकनीक को अपनाना चाहता है तो पहले किसी भवन विशेषज्ञ या इंसुलेशन एक्सपर्ट से सलाह जरूर ले.

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विदेशों में क्यों बढ़ रहा है इसका इस्तेमाल?
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों जैसे कई गर्म इलाकों में रेडिएंट बैरियर तकनीक का इस्तेमाल वर्षों से किया जा रहा है. वहां ऊर्जा की बचत और घरों को अधिक आरामदायक बनाने के लिए इसे भवन निर्माण का हिस्सा बनाया जाता है. कई नई इमारतों में शुरुआत से ही ऐसी इंसुलेशन सामग्री का उपयोग किया जाता है ताकि गर्मियों में घर कम गर्म हों और एयर कंडीशनिंग पर खर्च कम आए.

भारत में कितनी उपयोगी हो सकती है यह तकनीक?
भारत के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है. ऐसे में घरों को ठंडा रखना बड़ी चुनौती बन जाता है. अगर किसी घर की छत पूरे दिन धूप झेलती है, तो रेडिएंट बैरियर जैसी तकनीक मददगार साबित हो सकती है.

एल्युमिनियम फॉयल को लेकर सामने आई यह रिसर्च निश्चित रूप से दिलचस्प है. शोधकर्ताओं का कहना है कि सही तरीके से लगाए गए रेडिएंट बैरियर की मदद से घर के अंदर आने वाली गर्मी को 53 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि केवल एल्युमिनियम फॉयल लगाने से आपका घर पूरी तरह ठंडा हो जाएगा या एसी की जरूरत खत्म हो जाएगी.

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अगर इस तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इसे अन्य इंसुलेशन उपायों के साथ अपनाया जाए, तो यह गर्मियों में घर को अधिक आरामदायक बनाने, एसी की खपत कम करने और बिजली का बिल घटाने में मदद कर सकती है. इसलिए बिना पूरी जानकारी के साधारण किचन फॉयल लगाने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इस तकनीक को अपनाना बेहतर होगा.

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