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10 साल का काम अब 6 महीने में! AI के बाद बदले कंपनियों के तेवर, महिला ने बताया अपना दर्द

बेंगलुरु की टेक प्रोफेशनल रुपाली तिवारी का दावा है कि AI आने के बाद 5 की जगह अब मिल रहे 20-25 टास्क. उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

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5 टास्क की जगह अब मिल रहे 20-25 काम  (Photo:Insta/@rupali_tiwari__)
5 टास्क की जगह अब मिल रहे 20-25 काम (Photo:Insta/@rupali_tiwari__)

AI आया तो सबको लगा था काम आसान हो जाएगा. लेकिन बेंगलुरु की एक टेक प्रोफेशनल का दावा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है- उनके मुताबिक AI ने काम आसान करने के बजाय कर्मचारियों पर काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया है.

इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए रुपाली तिवारी ने बताया कि AI टूल्स आने के बाद टेक इंडस्ट्री में मैनेजरों और लीड्स की उम्मीदें आसमान छूने लगी हैं. अब उन्हें लगता है कि जब AI इतना काम कर रहा है, तो कर्मचारी पहले से कहीं ज्यादा काम आसानी से संभाल सकते हैं.

पहले डर था नौकरी जाने का, अब बढ़ गया वर्कलोड

रुपाली ने बताया कि जब शुरुआत में AI का इस्तेमाल शुरू हुआ था, तो कई लोगों को नौकरी जाने का डर सता रहा था. साथ ही काम भी काफी आसान लगने लगा था.उन्होंने कहा कि जब AI पहली बार आया तो लाइफ काफी आसान लगने लगी थी. लेकिन मन में यह डर भी था कि कहीं हमारी नौकरी ही न चली जाए.लेकिन कुछ समय बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई. मैनेजरों ने यह मानना शुरू कर दिया कि अगर AI काम आसान कर सकता है, तो कर्मचारियों को पहले से कहीं ज्यादा काम दिया जा सकता है.

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देखें वायरल वीडियो

5 टास्क की जगह अब मिल रहे 20-25 काम

रुपाली का दावा है कि पहले जहां किसी कर्मचारी को पांच काम दिए जाते थे, वहीं अब 20 से 25 काम दिए जाने लगे हैं.उन्होंने कहा कि अब आप चाहे जितना काम कर लें, वह काफी नहीं है. लोगों को लगता है कि AI तो सब कुछ कर ही रहा है, तो आप कर क्या रहे हैं? उन्होंने अपने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर दोस्त का उदाहरण भी दिया, जो एक बड़ी कंपनी में एक साथ करीब 10 प्रोजेक्ट संभाल रहा है- खुद कोड लिखता है, खुद रिव्यू करता है और खुद ही डिप्लॉय भी करता है.

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'10 साल का काम, 6 महीने में?'

उन्होंने कहा कि AI आने के बाद काम की रफ्तार और उम्मीदें इतनी बढ़ गई हैं कि लगता है जैसे कंपनियां 10 साल का काम छह महीने या एक साल में पूरा करवाना चाहती हैं.वीडियो को कैप्शन दिया गया कि AI के साथ ऐसा तो नहीं होना था. वीडियो के आखिर में रुपाली ने सवाल पूछा कि क्या यह सिर्फ उनकी कंपनी या टेक इंडस्ट्री में हो रहा है, या बाकी कर्मचारियों का भी यही अनुभव है.

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लोगों ने भी जताई सहमति

पोस्ट पर कई यूजर्स ने रुपाली की बात से सहमति जताई. एक ने लिखा कि AI ने प्रोडक्टिविटी बढ़ाई, लेकिन साथ ही उम्मीदें भी बढ़ा दीं. दूसरे ने लिखा कि जितना ज्यादा AI, उतना ही ज्यादा वर्कलोड.

अब सवाल यही उठ रहा है- AI सच में कर्मचारियों का काम कम कर रहा है, या कंपनियों ने इसे ज्यादा आउटपुट निकालने का जरिया बना लिया है?
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