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100 से ज्यादा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, छात्रा ने बताई सच्चाई

ब्रिटेन में पढ़ रहे भारतीय मूल के छात्र ने दावा किया है कि उन्हें 100 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन करने के बावजूद रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि AI बेस्ड हायरिंग प्रक्रिया के कारण कई बार कुछ ही मिनटों में आवेदन खारिज हो जाते हैं.

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अब एक नौकरी पाने के लिए लोगों को औसतन 200 आवेदन तक भेजने पड़ते हैं. ( Photo: Linkedin/ Bhuvana Chilukuri )
अब एक नौकरी पाने के लिए लोगों को औसतन 200 आवेदन तक भेजने पड़ते हैं. ( Photo: Linkedin/ Bhuvana Chilukuri )

ब्रिटेन में पढ़ रहे भारतीय मूल के एक छात्र का अनुभव इन दिनों चर्चा में है, जिसने नौकरी पाने में आ रही मुश्किलों को लेकर बड़ी बात कही है. यह छात्रा, भुवना चिलुकुरी, लंदन के एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने अब तक 100 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें एक भी ऑफर नहीं मिला. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कई बार उन्हें 2 मिनट से भी कम समय में रिजेक्शन मिल गया.

AI वीडियो इंटरव्यू बना ‘रोबोट जैसा’ अनुभव
भुवना का मानना है कि आजकल कंपनियां भर्ती के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. यानी शुरुआत में इंसान नहीं, बल्कि मशीन ही आपके CV को जांचती है. अगर AI को आपका प्रोफाइल पसंद नहीं आता, तो तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाता है. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर अगला स्टेप भी AI के जरिए होता है, जैसे वीडियो इंटरव्यू, जिसमें उम्मीदवार को स्क्रीन के सामने बैठकर सवालों के जवाब देने होते हैं. इस प्रक्रिया में किसी इंसान से बात नहीं होती, जिससे उन्हें यह पूरा सिस्टम 'रोबोट जैसा' लगता है.

कम नौकरियां, ज्यादा उम्मीदवारों की भीड़
भुवना ने यह भी कहा कि उन्होंने इंटर्नशिप और काम का अनुभव भी है, फिर भी नौकरी मिलना मुश्किल हो रहा है. उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में उम्मीदवार अपनी असली पर्सनैलिटी दिखा ही नहीं पाते, क्योंकि सब कुछ मशीन के जरिए हो रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल नौकरियों की संख्या कम हो गई है, जबकि आवेदन करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है. इसी वजह से कंपनियां बड़ी संख्या में आने वाले आवेदन को संभालने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब एक नौकरी पाने के लिए लोगों को औसतन 200 आवेदन तक भेजने पड़ते हैं.

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बदलती हायरिंग सिस्टम में खो रही पहचान
भुवना मानती हैं कि कंपनियों के पास ज्यादा आवेदन आने के कारण AI का इस्तेमाल जरूरी हो गया है, लेकिन इससे उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा कि अब छात्र भी AI का इस्तेमाल करके CV और आवेदन बना रहे हैं, क्योंकि सिस्टम ही ऐसा हो गया है. कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि नौकरी पाने का तरीका तेजी से बदल रहा है. AI से प्रक्रिया तेज जरूर हुई है, लेकिन इससे कई युवाओं को यह भी लग रहा है कि उनकी मेहनत और पहचान कहीं खो रही है.

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