
Stok Village Ladakh: लद्दाख घूमने जाएं, तो कितने दिन में सारी जगहें देख लेंगे? शायद 5 से 10 दिन में! लेकिन क्या किसी जगह को घूम लेना और उसे जीना, दोनों एक ही बात हैं? इसी सवाल का जवाब कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर बनीं प्रेरणा दलाल ने दिया. जो लेह के पास एक छोटा-सा गांव कुछ दिन बिताने पहुंची थीं, लेकिन देखते ही देखते 14 दिन रुक गईं.
यहां उन्हें लद्दाख का वह रूप देखने को मिला, जो आमतौर पर टूरिस्टों की नजरों से छूट जाता है. अगर आप भी लद्दाख घूमने का प्लान कर रहे हैं तो इस गांव को अपनी बकेट लिस्ट में जरूर शामिल कर लें, लद्दाख की कुछ पॉपुलर स्पॉट नहीं बल्कि असली लद्दाख की खूबसूरती इन पहाड़ी अनछुए गांवों में बसी है, जहां अक्सर लोग जाते ही नहीं है.
प्रेरणा ने 14 दिनों की अपनी इस जर्नी का अनुभव शेयर करते हुए एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जिसके बाद यह हिंडन विलेज सुर्खियों में आ गया है और उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. आइए उनके इस एक्सपीरियंस के बारे में खुलकर जानते हैं.
लद्दाख के खास गांव में बिताए 14 दिन
35 साल की उम्र में कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर बनीं प्रेरणा दलाल ने लद्दाख के स्टोक गांव में 14 दिन बिताए. अपने इस खास एक्सपीरियंस को उन्होंने लोगों के साथ शेयर किया है और बताया कि वो पिछले दो महीनों से लद्दाख में हैं और इनमें से 14 दिन उन्होंने इसी गांव में बिताए.
कहां पर है स्टोक गांव?
स्टोक, लेह से करीब 15 किलोमीटर दूर कांगरी पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा-सा गांव है. यहां की खूबसूरती के साथ-साथ स्थानीय जीवन और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलता है. प्रेरणा के मुताबिक, वह यहां कुछ दिन घूमने और गांव को समझने के इरादे से आई थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह जगह उनके लिए खास बन गई.

यहां मौजूद है लद्दाख के राजा का घर
प्रेरणा ने वीडियो में बताया कि स्टोक आने से पहले उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यहां लद्दाख के आखिरी राजा का घर है. यहां इतने दिनों तक ठहरने के बाद उन्हें अब यहां की राशन की दुकान से लेकर आसपास के सबसे सही रास्तों के बारे में भी पता है. वीडियो में लड़की का पुराना पुल, पहाड़, गाय और छोटी-सी दुकान भी नजर आईं.
लद्दाखी मोमोज बनाना सीखा
प्रेरणा ने सिर्फ लद्दाख में घूमने की जगहें ही नहीं देखी, बल्कि उन्होंने इतनों दिनों में लद्दाख के स्टाइल में मोमोज बनाने भी सीखें. होमस्टे में रहने के दौरान मेजबान के साथ चाय पर होने वाली बातचीत और लोकल लोगों से जान-पहचान उनकी इस जर्नी का खास हिस्सा बन गई.
पसंद है स्लो ट्रैवल
प्रेरणा का मानना है कि अगर वो सिर्फ कुछ पॉपुलर जगहों को घूमकर लौंट आती, तो उनको इतना बेहतरीन एक्सपीरियंस नहीं मिलता. उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, 'मैं जितनी ज्यादा इस तरह से यात्रा करती हूं, उतना ही मुझे एहसास होता है कि स्लो ट्रैवल (आराम से की गई यात्रा) ही सबसे बेहतर है. आप वहां के लोगों को जान पाते हैं, रोजमर्रा की जिंदगी के सुकून को महसूस कर पाते हैं, और जब आप लौटते हैं, तो उस जगह का एक छोटा सा हिस्सा हमेशा आपके साथ रह जाता है. यह एक ऐसी यात्रा है जिसे मैं हमेशा चुनना पसंद करूंगी.'
क्या है स्लो ट्रैवल, जो लोगों को पसंद आ रहा है?
आजकल कई लोग कम समय में ज्यादा से ज्यादा जगहें देखने की प्लानिंग बनाते हैं. एक दिन में कई टूरिस्ट प्लेस घूमना, फोटो क्लिक करना और अगली जगह के लिए निकल जाना आम बात है. लेकिन स्लो ट्रैवल यानी आराम से सफर का तरीका इससे अलग है. इसमें किसी जगह को जल्दबाजी में देखने के बजाय वहां कुछ समय बिताया जाता है. स्थानीय लोगों से बातचीत करना, उनके खानपान को समझना, गांव की गलियों में घूमना और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखना इस अनुभव का हिस्सा है.