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माघ मेला के लिए कैसे पहुंचें संगम नगरी, यहां जानें ट्रेन, रोड और फ्लाइट का पूरा रूट

प्रयागराज में माघ मेला 2026 की शुरुआत के साथ ही संगम नगरी की ओर श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज हो गई है. ऐसे में सवाल है कि किस रास्ते से पहुंचना ज्यादा आसान रहेगा और सफर के दौरान किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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प्रयागराज पहुंचने का आसान रास्ता (Photo: AP)
प्रयागराज पहुंचने का आसान रास्ता (Photo: AP)

Prayagraj Magh Mela 2026: आस्था और परंपरा का सबसे बड़ा संगम यानी 'माघ मेला' इस बार बेहद खास होने वाला है. 3 जनवरी 2026 से इस मेले का आगाज हो चुका है, जो 15 फरवरी तक चलेगा. ताज्जुब की बात तो यह है कि 2025 में लोगों ने गोवा के समंदर (Beaches) या कश्मीर की बर्फीली चोटियों के बजाय 'कुंभ नगरी' प्रयागराज को सबसे ज्यादा सर्च किया है. अगर आप भी इस बार संगम की रेती पर पुण्य की डुबकी लगाने की तैयारी में हैं, तो रास्ते की चिंता बिल्कुल छोड़ दीजिए. ट्रेन की रफ्तार हो, हाईवे का सफर या फिर हवाई उड़ान, प्रयागराज पहुंचना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. चलिए जानते हैं कि आप अपनी सुविधा के अनुसार कुंभ नगरी तक कैसे पहुंच सकते हैं.

हवाई सफर से लेकर पटरियों तक ऐसे तय करें संगम का रास्ता

प्रयागराज न केवल एक बड़ा तीर्थ स्थल है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश का एक ऐसा केंद्र है, जो देश के हर प्रमुख शहर से बेहतरीन तरीके से जुड़ा हुआ है. यहां आने के लिए आपके पास ये तीन मुख्य विकल्प हैं.

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1. रेल यात्रा: प्रयागराज, उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय है, इसलिए रेल मार्ग यहां आने का सबसे पसंदीदा जरिया है. खास बात यह है कि शहर में और उसके आसपास कुल 9 रेलवे स्टेशन हैं. प्रयागराज जंक्शन दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े महानगरों से सीधा जुड़ा हुआ है. स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको ई-रिक्शा, ऑटो और सिटी बसें मिल जाएंगी, जो बेहद कम किराए में आपको सीधे मेला क्षेत्र के प्रवेश द्वार तक पहुंचा देंगी.

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मेले के दौरान रेलवे की ओर से दर्जनों 'स्पेशल ट्रेनें' और अतिरिक्त बसें संचालित की जाती हैं, ताकि संगम आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़-भाड़ की समस्या न हो और उनका सफर पूरी तरह आरामदायक रहे.

2. सड़क मार्ग: अगर आप अपनी कार से या बस के जरिए प्रयागराज आने का मन बना रहे हैं, तो यहां की रोड कनेक्टिविटी आपको वाकई खुश कर देगी. भारत के मैदानी इलाकों के केंद्र में बसे होने की वजह से प्रयागराज के चारों ओर नेशनल हाईवे का एक शानदार जाल बिछा हुआ है. दिल्ली और कोलकाता को जोड़ने वाला प्रसिद्ध NH-2 सीधा शहर के बीच से गुजरता है, जो सफर को काफी आसान बना देता है. वहीं अगर आप मध्य प्रदेश या राजस्थान की तरफ से आ रहे हैं, तो NH-27 और NH-76 जैसे हाईवे आपको बिना किसी परेशानी के सीधे शहर के प्रवेश द्वार तक ले आएंगे. इतना ही नहीं, जो श्रद्धालु 'अयोध्या' में रामलला के दर्शन करने के बाद प्रयागराज आना चाहते हैं, उनके लिए NH-96 का रूट सबसे बेहतरीन विकल्प है. शहर के सिविल लाइंस और जीरो रोड बस अड्डों की रौनक भी देखते ही बनती है, जहां से आपको हर 15-20 मिनट में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के लिए बसें आसानी से मिल जाएंगी.

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3. वायु सेवा: समय की कमी है? तो फिर फ्लाइट सबसे बेस्ट है. प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा (Prayagraj Airport) मुख्य शहर से सिर्फ 12 किलोमीटर की दूरी पर है. इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइन्स दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से रोजाना उड़ानें संचालित करती हैं. इसके अलावा, अगर आपको सीधी फ्लाइट न मिले, तो आप वाराणसी (150 किमी) या लखनऊ (200 किमी) एयरपोर्ट पर उतरकर वहां से टैक्सी या बस के जरिए 3-4 घंटे में प्रयागराज पहुंच सकते हैं.

ट्रेवल टिप: माघ मेले के दौरान मुख्य स्नान पर्वों पर शहर के अंदर भारी वाहनों की एंट्री बंद रहती है, इसलिए कोशिश करें कि मेला क्षेत्र के करीब पहुंचने के लिए ई-रिक्शा या पैदल मार्ग का सहारा लें.
 

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