सुनामी (Tsunami) एक विशाल समुद्री लहर होती है, जो आमतौर पर समुद्र के भीतर भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन या समुद्र में उल्कापिंड के गिरने जैसी घटनाओं के कारण उत्पन्न होती है. यह लहर समुद्र की गहराई में तो धीमी और कम ऊंचाई की होती है, लेकिन जैसे ही यह तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ती है, इसकी गति धीमी होती जाती है और ऊंचाई कई मीटर तक बढ़ जाती है, जिससे तटीय इलाकों में भारी तबाही मच सकती है.
26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आए सुनामी ने भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया और अन्य देशों में लगभग 2 लाख से अधिक लोगों की जान ले ली थी. यह अब तक की सबसे विनाशकारी सुनामी में से एक थी.
सुनामी के मुख्य कारणों में समुद्र के नीचे भूकंप आना, समुद्री ज्वालामुखी विस्फोट होना, जल के भीतर भूस्खलन और बड़ा उल्कापिंड समुद्र में गिरना हो सकता है.
8 जून 2026 को मिंडानावो में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद सारंगानी प्रायद्वीप की समुद्री जमीन बाहर आ गई. गांव वाले घबरा गए. जो नावें पानी की लहरों पर थी, अब उनके नीचे जमीन थी.
जापान के होनशू द्वीप पर 6.0 और चीन के उत्तरी किंगहाई प्रांत में 6.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया है. दोनों देशों में इमारतें हिलने से दहशत फैल गई, हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है.
फिलीपींस में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई. 41 लोगों की मौत हो गई. 500 से ज्यादा घायल हुए. 2500 मकान क्षतिग्रस्त हो गए. भूकंप के बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है.
दक्षिणी फिलीपींस में आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप में 41 लोगों की मौत हो गई और 450 से अधिक घायल हैं. मलबे के कारण कई इलाके कट गए हैं. सुनामी लहरों का वीडियो वायरल हो रहा है.
फिलीपींस में आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है. झटकों के बाद फिलीपींस और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई है. तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है, जबकि एजेंसियां संभावित नुकसान और समुद्र के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं.
अलास्का के ट्रेसी आर्म फोर्ड में पिछले साल क्लाइमेट चेंज के कारण 1580 फीट ऊंची मेगा सुनामी आई थी. यह एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से भी ऊंची थी. सुबह 5:30 बजे होने से कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन अगली बार हम लकी नहीं होंगे.
जापान में 7.5 तीव्रता के इस भूकंप के बाद यह अटकलें लगने लगी हैं कि इसके बाद जापान में मेगा भूकंप आ सकता है. जब भी इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप आता है, तो ऐसे संभावित मेगा भूकंप को लेकर चिंता बढ़ जाती है.
जापान में 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी अलर्ट जारी की गई है. तटीय इलाकों में लोगों को सेफ जगहों पर जाने की सलाह दी गई है. आफ्टर शॉक्स और संभावित मेगाक्वेक को लेकर भी चिंता बढ़ी है, जिससे प्रशासन हाई अलर्ट पर है.
इंडोनेशिया के टेर्नेट के पास 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे सुनामी का खतरा पैदा हो गया. कंपन महसूस होने के बाद लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए. तटीय इलाकों में चेतावनी जारी की गई है.
जापान दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु संयंत्र काशिवाजाकी-कारीवा को फुकुशिमा हादसे के 15 साल बाद फिर से शुरू करने की तैयारी में है. 2011 के भूकंप और सुनामी के बाद बंद हुए 54 रिएक्टरों में से यह पहला बड़ा कदम है. ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जापान परमाणु ऊर्जा की ओर लौट रहा है, लेकिन स्थानीय निवासी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.
रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निगरानी में परमाणु शक्ति से चलने वाले अंडरवाटर ड्रोन 'पोसाइडन' का सफल परीक्षण कर दुनिया में हलचल मचा दी है. पुतिन ने दावा किया है कि यह हथियार असीमित दूरी तय कर 'रेडियोएक्टिव सुनामी' पैदा करने में सक्षम है, जिससे तटीय शहरों को नष्ट किया जा सकता है.
मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के अनुसार, गंभीर क्षति पहुंचाने में सक्षम एक बड़े भूकंप को 7.0-7.9 की तीव्रता वाला माना जाता है. हर साल इस तीव्रता के लगभग 10-15 भूकंप ही दर्ज किए जाते हैं.
साइबेरिया से अलास्का तक का इलाका भूकंप और सुनामी जोन इसलिए है क्योंकि ये रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है, जहां पैसिफिक और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट्स आपस में टकराती हैं. सबडक्शन और फॉल्ट लाइन्स की वजह से यहां भूकंप आम हैं. समुद्र तल की हलचल सुनामी लाती है. ये प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इंसानों की तैयारी से इसके नुकसान को कम किया जा सकता है.
भारत में एक सिस्टम है जो भूकंप और सुनामी की पहले से चेतावनी देता है. इसमें सेंसर, रडार और सैटेलाइट लगे हैं जो 10-30 मिनट में अलर्ट भेजते हैं. यह सिस्टम 2007 से काम कर रहा है और लोगों को सुरक्षित रखता है. INCOIS और IMD मिलकर इसे और बेहतर कर रहे हैं. 2004 की त्रासदी के बाद शुरू हुआ यह सिस्टम आज लाखों लोगों की जिंदगी बचा रहा है.
भारत में भूकंप और सुनामी की चेतावनी के लिए हाईटेक सिस्टम काम कर रहा है. जानें INCOIS, IMD और ISRO मिलकर कैसे 10–30 मिनट में अलर्ट भेजते हैं और लोगों की जान बचाते हैं.
कामचटका प्रायद्वीप में 8.8 तीव्रता का भूकंप और उसके बाद का ज्वालामुखी विस्फोट इस क्षेत्र की नाजुक स्थिति को दिखाता है. अवाचा बेस पर परमाणु पनडुब्बियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई पक्का नुकसान साबित नहीं हुआ. रूस का दावा है कि सब ठीक है, लेकिन विशेषज्ञ सतर्क हैं. आफ्टरशॉक्स का खतरा बना हुआ है, इसलिए दुनिया की नजर इस इलाके पर टिकी है.
महाभूकंप के झटकों से रूस की धरती हिली लेकिन पाताल से उठी तबाही की तरंगों से जापान से लेकर अमेरिका तक हाहाकार मच गया. भूकंप इतना विनाशकारी था कि कई घंटों तक दुनिया के 12 मुल्कों की सांसे अटकी रहीं. रूस में 73 साल बाद ऐसा विनाशकारी भूकंप आया, जो दुनिया का छठा सबसे बड़ा भूंकप है.
सुनामी गहरे समुद्र में जेट विमान की तरह तेज (800 किमी/घंटा) चलती है, लेकिन तट पर आते-आते धीमी (20-30 किमी/घंटा) हो जाती है. इस दौरान उसकी ऊंचाई बढ़कर 10-30 मीटर हो सकती है, जो शहरों को तबाह कर देती है. सही जानकारी और तैयारी से इसकी मार से बचा जा सकता है.
देश, दुनिया, राज्य, महानगर, खेल, आर्थिक और बॉलीवुड में क्या कुछ हुआ? पल-पल की बड़ी जानकारी के लिए पढ़ें 31 जुलाई, सोमवार की खबरों का लाइव अपडेशन...
NASA ISRO Nisar Satellite Launch: निसार मिशन पृथ्वी का "एमआरआई स्कैनर" है, जो भूकंप, सुनामी, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पहले से चेतावनी देगा. यह सैटेलाइट दोहरे रडार सिस्टम, हर मौसम में काम करने की क्षमता, और सेंटीमीटर स्तर की सटीकता के साथ पृथ्वी की सतह को स्कैन करेगा.
NISAR Satellite हुआ Launch… ये सैटेलाइट भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पहले से चेतावनी देगा.