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रागी

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रागी (Ragi), जिसे अंग्रेजी में फिंगर मिलेट (Finger Millet) कहा जाता है, भारत के सबसे पुराने और पौष्टिक मोटे अनाजों में से एक है. यह मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में उगाया जाता है. रागी का वैज्ञानिक नाम Eleusine coracana है. यह कम पानी में भी अच्छी तरह उगने वाली फसल है, इसलिए इसे जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

रागी में कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. अन्य अनाजों की तुलना में इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है. इसके अलावा इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक अमीनो एसिड भी मौजूद होते हैं.

रागी का उपयोग विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाता है. इससे रोटी, डोसा, इडली, उपमा, दलिया, खिचड़ी, लड्डू, कुकीज, बिस्कुट, केक, माल्ट और पेय पदार्थ तैयार किए जाते हैं. शिशुओं के पूरक आहार में भी रागी का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है.

भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मोटे अनाजों को बढ़ावा दिए जाने के बाद रागी की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है. इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इसकी लंबी शेल्फ लाइफ और कम भंडारण लागत के कारण यह किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए उपयोगी अनाज है.

रागी का उपयोग पारंपरिक भारतीय भोजन के साथ-साथ आधुनिक हेल्दी रेसिपीज में भी तेजी से बढ़ रहा है. पोषण, टिकाऊ खेती और खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से रागी को भविष्य के महत्वपूर्ण अनाजों में शामिल किया जाता है.

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