कांग्रेस की चेयरपर्सन और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत एक वीडियो जारी कर केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (MGNREGA) को कमजोर करने और उस पर 'बुलडोजर' चलाने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने ये भी कहा कि ये कानून गरीबों, बेरोजगारों और वंचितों के हितों पर सीधा हमला है.
सोनिया गांधी ने मंगलवार को मनरेगा बचाओं संग्राम के अंतर्गत वीडियो जारी कर याद दिलाया कि 20 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में मनरेगा कानून सर्वसम्मति से संसद में पास हुआ था. उन्होंने इसे एक क्रांतिकारी कदम बताया, जिसने परिवारों के पलायन को रोका और ग्रामीणों को रोजगार का कानूनी हक दिया. मनरेगा ने करोड़ों गरीब परिवारों को जीवनयापन का सहारा प्रदान किया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी.
गरीब-बेरोजगारों और वंचितों को किया नजरअंदाज
कांग्रेस चेयरपर्सन ने आरोप लगाया कि पिछले 11 सालों में मोदी सरकार ने गरीबों, बेरोजगारों और वंचितों के हितों को नजरअंदाज किया.
उन्होंने कहा, 'मनरेगा कानून से सिर्फ महात्मा गांधी जी का नाम ही नहीं हटाया गया, बल्कि इस पर बुलडोजर चलाया गया. विपक्ष से बिना किसी सलाह-मशविरे के मनमाने ढंग से बदलाव किए गए. अब किसको कितना, कैसे और कहां रोजगार मिलेगा, ये सब जमीनी हकीकत से दूर दिल्ली में बैठकर सरकार तय करेगी.'
यहां देखें वीडियो
भूमिहीन किसानों पर हमला
उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा लाने में कांग्रेस का बड़ा योगदान था, लेकिन ये कभी पार्टी से जुड़ा मामला नहीं रहा- ये देशहित और जनहित से जुड़ा मुद्दा है. मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करके करोड़ों किसानों, गरीबों, भूमिहीनों पर हमला किया जा रहा है.
सोनिया गांधी ने घोषणा की, 'इस हमले का मुकाबला हमें मिलकर करना होगा. 20 साल पहले अपने गरीब भाइयों-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलाने के लिए मैं भी लड़ी थी, अब इस 'काले कानून' के खिलाफ लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं.'
कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ संग्राम'
ये वीडियो कांग्रेस के 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान 'मनरेगा बचाओ संग्राम' का हिस्सा है जो 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा. इस दौरान कांग्रेस शांतिपूर्ण धरना, विधानसभा घेराव, पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान और 'काम मांगो अभियान' चलाएगी.
पार्टी का दावा है कि केंद्र ने हाल ही में VB-G RAM G (विकसित भारत- ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन) नामक नए कानून से मनरेगा को प्रतिस्थापित कर दिया है जो मूल रूप से रोजगार की गारंटी को कमजोर करता है और इसे केंद्रीय विवेक पर छोड़ देता है.