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महंत राजू दास

महंत राजू दास

महंत राजू दास

महंत राजू दास अयोध्या स्थित प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के संत हैं. धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं.

महंत राजू दास के शुरुआती जीवन के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब उनकी उम्र करीब साढ़े चार साल थी, तब उनके माता-पिता उन्हें अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में छोड़ गए थे. इसके बाद मंदिर के संत महंत राम दास ने उनका पालन-पोषण किया और उन्हें धार्मिक दीक्षा दी.

राजू दास की शिक्षा भी अयोध्या में ही हुई. उन्होंने स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद के.एस. साकेत पीजी कॉलेज से राजनीति विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की. छात्र जीवन के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े और वर्ष 2018 तक छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. बाद में उन्होंने बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं.

महंत राजू दास खुद को नागा साधु बताते हैं. उनके अनुसार, जब वह हनुमानगढ़ी पहुंचे थे, उस समय वहां करीब 1500 साधु रहते थे, जो निर्वाणी अखाड़े से जुड़े हुए थे. हनुमानगढ़ी का प्रबंधन निर्वाणी अखाड़े की चार प्रमुख पट्टियों- उज्जैनिया, बसंतिया, हरद्वारी और सागरिया के संतों द्वारा किया जाता है. राजू दास उज्जैनिया पट्टी से जुड़े हैं.

महंत राजू दास कई बार अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. रामचरितमानस पर की गई कथित टिप्पणियों को लेकर उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध किया था. इसके अलावा अभिनेत्री स्वरा भास्कर पर दिए गए अपने बयान को लेकर भी उनका नाम समाचारों में आया था.

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