प्रयागराज प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने माघ पूर्णिमा पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा पूरे सम्मान के साथ स्नान कराने के किसी भी प्रयास से स्पष्ट इनकार किया है. मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद अधिकारियों ने दोबारा संपर्क करने की खबरों को नकार दिया. यह स्थिति तब बनी जब शंकराचार्य के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने दावा किया कि प्रशासन उन्हें मनाने की कोशिश कर रहा है.
इसी बीच 18 जनवरी को बटुकों के साथ हुई मारपीट का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां अधिकारियों पर कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के PRO का कहना है कि प्रशासन के बड़े अफसर उन्हें दोबारा स्नान के लिए मनाने की कोशिश में जुटे हैं. हालांकि, स्वामी जी की ओर से कड़ी शर्तें रखी गई हैं. उन्होंने प्रशासन से लिखित माफी मांगने, मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने और चारों शंकराचार्य के स्नान के लिए एक स्थाई SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाने की मांग की है. इसके विपरीत, प्रयागराज के प्रशासनिक अमले ने साफ कर दिया है कि उनकी ओर से ऐसी कोई कोशिश नहीं की जा रही है.
हाईकोर्ट पहुंचा बदसलूकी का मामला, CBI जांच की मांग
मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई बदसलूकी का मामला अब कानूनी रूप ले चुका है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक लेटर पिटीशन दाखिल की गई है. इस याचिका में 18 जनवरी को बटुकों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने, संबंधित अफसरों को सस्पेंड करने और पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की अपील की गई है. वकील की ओर से दाखिल इस याचिका ने माघ मेले के बीच प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.
आपको बता दें कि प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वाराणसी लौट गए हैं. स्वामी जी ने माघी पूर्णिमा के स्नान के लिए प्रशासन के सामने दो प्रमुख शर्तें रखी हैं-
1- मौनी अमावस्या के दिन हुई अभद्रता के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित माफी मांगें.
2- चारों शंकराचार्यों के लिए स्नान का एक स्थाई प्रोटोकॉल निर्धारित किया जाए.
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी के अनुसार, यदि प्रशासन इन शर्तों को स्वीकार करता है, तो अधिकारी वाराणसी जाकर उन्हें मनाएंगे और ससम्मान प्रयागराज लाकर स्नान कराएंगे. हालांकि, अधिकारियों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से दोबारा संपर्क करने की खबरों को नकार दिया है.