माघ मेला प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद का मामला शांत नहीं हो रहा है. इसी बीच अब योगी सरकार में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने उनपर बड़ा बयान दिया और उन पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें शंकराचार्य नहीं मानती है और न ही सरकार यह पद बांटने का काम करती है.
दरअसल, बरेली पहुंचे पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने गोतस्करी पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद झूठ बोल रहे हैं. उन्हें तथ्यों की जानकारी नहीं है. गोतस्करों के दबाव में वह उत्तर प्रदेश में भ्रम और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता ही गोरक्षा है.
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सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने 2017 से ही गोरक्षा पर काम शुरू कर दिया था. सरकार बनते ही अवैध स्लॉटर हाउस बंद कराना पहला फैसला था. हजारों अवैध स्लॉटर हाउस योगी सरकार में बंद किए गए. उत्तर प्रदेश में गोहत्या और गोमांस पूरी तरह प्रतिबंधित है. प्रदेश में केवल भैंस, सूअर और बकरे का मीट ही नियमों के तहत वैध है.
गोहत्या मामले में की जाती है NSA के तहत कार्रवाई
गोहत्या मामलों में NSA तक की कार्रवाई की गई है. कई आरोपी जेल में बंद हो कर सड़ रहे हैं. सरकार का साफ संदेश है आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं. सरकार किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं करती है. शंकराचार्य कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं है. धार्मिक पद की आड़ में राजनीति और कानून तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं है.
सरकार का सीधा निर्देश है सरकार किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं करती है. शंकराचार्य पद सरकारी नियुक्ति नहीं है. हमारी सरकार का स्पष्ट रुख है कि मठों और परंपराओं को राजनीतिक नहीं बनने दिया जाएगा. स्पष्ट मत है कि कोई भी व्यक्ति अगर धार्मिक पद की आड़ में भ्रम फैलता है तो उसको सरकारी मान्यता नहीं मिल सकती. सरकार केवल कानून व्यवस्था और शांति व्यवस्था देखती है. किसी प्रकार के विवादित धार्मिक दावे का समर्थन नहीं करती है.
सरकार ने नहीं माना है शंकराचार्य
अविमुक्तेश्वरानंद को सरकार ने शंकराचार्य नहीं माना है और न ही किसी आधिकारिक मंच से मान्यता दी है. सरकार का सिद्धांत है विवाद से दूरी व्यवस्था पर फोकस. गोहत्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस के तहत काम कर रही है. सरकार धार्मिक पद नहीं बांटती और कानून तोड़ने की किसी को छूट भी नहीं देती है.